स्टडी में खुलासा : बकरियों को भी पसंद नहीं आते गुस्से वाले इंसान

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लंदन। आपको यह सुनने में थोड़ा अटपटा और अजीब लग सकता है, लेकिन हाल में हुई एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि बकरियों को गुस्‍से वाले इंसान पसंद नहीं आते। वे इंसानों के मुस्कराते और गुस्साए चेहरों में फर्क करना जानती हैं।

किसने किया अध्‍ययन ?

लंदन की क्वीन मेरी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह अध्‍ययन किया है। साइंस पत्रिका ‘रॉयल सोसायटी ओपन साइंस’ में छपी इस स्टडी में दावा किया गया है कि बकरियों में इंसानी भावों को पढ़ने की क्षमता होती है। बकरियों को आम तौर पर उनसे मिलने वाले दूध और मांस के लिए पाला जाता रहा है, लेकिन अब तक यह नहीं पता था कि उनमें इंसानी भावनाओं की इतनी समझ होती है जैसी कि कुत्तों या घोड़े जैसे जानवरों में होती है।

कैसे किया अध्‍ययन ?

क्वीन मेरी यूनिवर्सिटी के रिसर्चर और स्टडी के सह-लेखक क्रिस्टियान नावरोथ बताते हैं कि इस स्टडी में बकरियों को एक व्यक्ति की दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाई गईं। एक तस्वीर में व्यक्ति के चेहरे पर खुशी के भाव थे तो वहीं दूसरी में गुस्से के। रिसर्चरों ने देखा कि 20 पालतू बकरियां इस प्रयोग में मुस्कराते हुए चेहरे की तरफ गईं और अपने थूथन से उसे छुआ। नावरोथ कहते हैं, ‘बकरियों ने खुशी वाले चेहरे के साथ औसतन 1.4 सेकंड और क्रोधित चेहरे के साथ 0.9 सेकंड का वक्त बिताया। इसका मतलब है कि बकरियां तकरीबन 50 फीसदी अधिक समय मुस्कराते हुए चेहरे के साथ रहीं।’

क्‍या कहना है शोधकर्ताओं का ?

नावरोथ के मुताबिक, ‘अपने आसपास का माहौल समझने में पशुओं का दिमाग काफी विवेकशील होता है। वे इंसान के चेहरे के भावों को समझ कर उसके मुताबिक अपने व्यवहार को ढाल लेते हैं।’ उन्‍होंने बताया, ‘शोध के दौरान देखा गया कि जब हंसते-खिलखिलाते चेहरों वाली तस्वीरों को गुस्से वाली तस्वीर की दाईं तरफ रखा गया तब भी बकरियां खुशी वाली तस्वीरों की तरफ गईं। इससे पता चलता है कि ये पशु किसी सकारात्मक भाव को समझने के लिए दिमाग के बाएं हिस्से का प्रयोग करते हैं।’ एक अन्य रिसर्चर एलन मैकइलिगोट का कहना है, ‘यह अध्ययन मवेशियों और अन्य पशुओं के साथ हमारे संपर्क के तौर-तरीकों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि इंसानी भावों को समझने की क्षमता सिर्फ पालतू जानवरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह काफी व्यापक हो सकती है।’

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