बुध ग्रह पर भेजा गया अंतरिक्ष यान बताएगा कैसे बना हमारा सौरमंडल !

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फ्रेंच गुयाना। यूरोप और जापान ने संयुक्‍त रूप से एक अंतरिक्ष यान को बुध ग्रह के लिए रवाना किया है। यह मानवरहित अंतरिक्ष यान इन बातों की छानबीन करेगा कि बुध ग्रह का भीतरी भाग तरल है या फिर ठोस और ऐसा क्यों है ? क्या सूर्य के सबसे नजदीकी ग्रह से पता चल सकता है कि सौरमंडल का निर्माण कैसे हुआ ?

7 साल में पहुंचेगा अंतरिक्ष यान

यूरोप और जापान का संयुक्त अंतरिक्ष यान फ्रेंच गुयाना से शनिवार (20 अक्‍टूबर) को आरियाने रॉकेट के जरिए बुध ग्रह के लिए रवाना हुआ। वहां पहुंचने पर यह मानवरहित यान दो यंत्रों को छोड़ेगा जो पहाड़ी ग्रह और सोलर सिस्टम के आंकड़े जुटाएंगे। इस अभियान का नाम ‘बेपी कोलंबो’ रखा गया है। यह नाम उस इटैलियन गणितज्ञ के नाम पर रखा गया है जिसने सबसे पहले बुध ग्रह की परिक्रमा और कक्षा के बीच संबंध को समझाया था। हालांकि इन उपकरणों को ले जा रहे आरियाने 5 रॉकेट को अपनी मंजिल पर पहुंचने में 7 साल लगेंगे। इस दौरान यह 90 लाख किलोमीटर की यात्रा करेगा।

भेजे गए हैं दो अंतरिक्ष यान

दरअसल, बेपी कोलंबो अभियान में दो अंतरिक्ष यान काम करेंगे। पहला बुध की परिक्रमा करने वाला ऑर्बिटर जिसे यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने बनाया है। यह ग्रह की सतह और उसके भीतरी घटकों की जांच करेगा। दूसरा यान है मरकरी मैग्नेटोस्फेरिक ऑर्बिटर जिसे जापान की एयरोपस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी ने बनाया है। यह ग्रह के चारों ओर मौजूद क्षेत्र की जांच करेगा जिस पर बुध के चुंबकीय क्षेत्र का असर होता है। फ्रांस के नेशनल सेंटर फॉर स्पेस रिसर्च के इंजीनियर पिएरे बुस्क्वे मिशन में शामिल फ्रेंच टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।

क्‍या कहना है वैज्ञानिकों का ?

पेरिस ऑब्जरवेटरी के अंतरिक्ष विज्ञानी अलायन डोरेसाउंडिरम ने समाचार एजेंसी एएएफपी से बातचीत में बताया, ‘पृथ्वी कैसे बनी यह समझने के लिए हमें यह समझना होगा कि चट्टानी उपग्रहों का निर्माण कैसे हुआ ? बुध सबसे अलग है और हम नहीं जानते कि ऐसा क्यों है ?’ डोरेसाउंडरिम का कहना है, ‘अगर बर्फ की मौजूदगी की पुष्टि हो जाती है तो इसका मतलब है कि पानी के कुछ नमूने सौरमंडल की उत्पत्ति के समय के हैं। इनके जरिए सौरमंडल के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। बता दें कि बुध ग्रह सूरज से करीब 5.8 किलोमीटर दूर है।

क्‍या पता लगाएगा अंतरिक्ष यान ?

इंजीनियर पिएरे बुस्क्वे ने कहा, ‘बुध ग्रह असाधारण रूप से छोटा है और इससे यह अनुमान लगाया जाता है कि अपने शुरुआती दिनों में इसने विशाल टक्करों का सामना किया। इसकी सतह पर दिखने वाला एक विशाल गड्ढा मुमकिन है कि उन टक्करों के कारण ही बना हो।’ इस बात की सच्चाई का पता लगाना भी बेपीकोलंबो के काम में शामिल है। अंतरिक्ष यान यह भी पता लगाएगा कि बुध ग्रह का भीतरी हिस्सा इसके कुल वजन का सबसे ज्यादा यानी करीब 55 फीसदी क्यों है। पृथ्वी का भीतरी हिस्सा यानी क्रोड उसके वजन का महज 30 फीसदी है। सूरज की परिक्रमा करने वालों में पृथ्वी के अलावा बुध अकेला ऐसा चट्टानी ग्रह है जिसके पास चुंबकीय क्षेत्र है। इसके आकार को देखते हुए चुंबकीय क्षेत्र तरल क्रोड की वजह से भी उत्पन्न हो सकता है। हालांकि उनका कहना है कि बुध को अब तक ठंडा हो कर जम कर ठोस बन जाना चाहिए था जैसा कि मंगल ग्रह के मामले में हुआ है।

क्‍या है बुध ग्रह की खासियत ?

बुध ग्रह कई मामलों में चरम पर है। इसकी सतह पर तापमान गर्म दिन में 430 डिग्री सेल्सियस तो ठंडी रातों में माइनस 180 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। ऐसे दिन और ऐसी रातें पृथ्वी के तीन-तीन महीनों तक चलती हैं। इससे पहले के कुछ अभियानों में ग्रह के ध्रुवीय ज्वालामुखियों में बर्फ होने के सबूत मिले हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बुध ग्रह की सतह पर धूमकेतुओं के टकराने के कारण ऐसा हुआ होगा। बुस्क्वे ने बताया, ‘यह ग्रह सौर हवाओं की मार भी झेलता है। इस हवा में बहुत से विद्युत आवेशित कण होते हैं जो इसकी सतह पर 500 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से बरसते रहते हैं। वैज्ञानिक इन हवाओं के असर का भी अध्ययन कर सकेंगे। पृथ्वी के वायुमंडल से टकराने वाली हवाओं की तुलना में ये हवाएं करीब 10 गुना ज्यादा मजबूत होती हैं।

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