शोध में खुलासा : कैंसर से निजात के बाद भी बच्चों में मिले इलाज के दुष्प्रभाव

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नई दिल्‍ली। विज्ञान की प्रगति के साथ-साथ बचपन के कैंसर से उबरने की दर में न केवल सुधार हो रहा है, बल्कि कैंसर से निजात पाने के बाद लंबा जीवन जीने वाले लोगों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। हालांकि भारतीय शोधकर्ताओं के एक ताजा अध्ययन में यह बात सामने आई है कि बच्‍चों में कैंसर के इलाज के बाद इसके उपचार से जुड़े दुष्प्रभाव कुछ समय बाद उभर सकते हैं।

किसने किया अध्‍ययन ?

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्‍ली के शोधकर्ताओं ने यह अध्‍ययन किया है। अध्ययनकर्ताओं में शामिल एम्स के बाल रोग विभाग से जुड़ीं डॉ. रचना सेठ का कहना है, ‘कैंसर से उबरने वाले बच्चों में बीमारी के उपचार के लिए दी जाने वाली थेरेपी के देर से पड़ने वाले प्रभावों के विस्तार का आकलन करने के लिए यह अध्ययन किया गया है। यह अध्ययन शोध पत्रिका ‘इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ में प्रकाशित किया गया है।

कैसे किया अध्‍ययन ?

शोधकर्ताओं ने अध्ययन के दौरान एम्स में कैंसर की बीमारी से उबर चुके 300 बच्चों के निरीक्षण से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया है। 5 साल तक किए गए इस निरीक्षण के दौरान कैंसर से निजात पा चुके बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के साथ-साथ उनमें बीमारी के दोहराव संबंधी लक्षणों का भी अध्ययन किया गया है। अध्ययन के दौरान मरीजों के प्राथमिक निदान, उपचार और उनमें रोग की वर्तमान स्थिति को दर्ज किया गया है और पूरी पड़ताल के बाद कैंसर थेरेपी के दूरगामी प्रभावों का निर्धारण किया है।

क्‍या निकला नतीजा ?

अध्ययन में शामिल कुल मामलों में से 25 प्रतिशत ब्‍लड कैंसर से जुड़े थे। इनमें सामान्य प्राथमिक निदान में लिंफोब्लास्टिक ल्यूकेमिया, रेटिनोब्लास्टोमा और हॉडकिंस लिंफोमा के मामले शामिल थे। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि बचपन के कैंसर से उबर चुके लगभग 50 फीसदी मरीजों में लिंफोब्लास्टिक ल्यूकेमिया, रेटिनोब्लास्टोमा और हॉडकिंस लिंफोमा के लक्षण देखे गए हैं। लगभग 23 प्रतिशत बच्‍चे अल्प विकलांगता, कम वजन या फिर धीमे शारीरिक विकास से ग्रस्त पाए गए हैं। वहीं, 13 प्रतिशत लोग मध्यम अक्षमता से ग्रस्त पाए गए, जिन पर चिकित्सीय ध्यान देने की जरूरत है। अध्‍ययन में पता चला कि 11 लोगों में बीमारी दोबारा हावी हो गई, जिनमें से 5 लोगों को अपनी जान गवांनी पड़ी।

दोबारा प्रभाव उभरना चिंताजनक

विकासशील देशों में बच्चों के कैंसर के उपचार के बाद देर से उभरने वाले बीमारी के लक्षणों के आकलन के लिए कई अध्ययन हुए हैं। इनके मुताबिक उपचार की उन्नत तकनीक व बेहतर देखभाल के कारण मरीजों में इस बीमारी से उबरने की दर हाल के वर्षों में बढ़ी है। हालांकि, कैंसर से छुटकारा पाने वाले एक तिहाई से 50 प्रतिशत बच्चों में उपचार पूरा होने के बाद भी इसके प्रभाव देखे गए हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि कैंसर का उपचार पूरा होने के बाद उभरने वाले प्रभाव चिंताजनक हैं। ऐसे में इस रोग और इसके उपचार के असर का आकलन करना जरूरी है। देर से स्पष्ट होने वाले इसके प्रभाव के बारे में मरीजों, अभिभावकों और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच जागरूकता का प्रसार भी करना होगा।

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