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अपने देश को इन खतरों से बचाना चाहते हैं, तो बचाइए अपना पर्यावरण

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नई दिल्ली। अगर आप नहीं चाहते कि हमारे मुल्क में वर्ग संघर्ष बढ़े, नक्सलियों को समर्थन में बढ़ोतरी हो और समाज में अमीर और गरीब के बीच खाई बढ़े, तो पर्यावरण को बचाइए। क्योंकि पर्यावरण में बदलाव इन सारे खतरों को और बढ़ाता है। ये बात एक नई रिसर्च से सामने आई है।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की पेरनिला नॉरविस्ट और फ्लोरियन क्राम्पे ने एक रिसर्च के बाद ये दावा किया है कि पर्यावरण में बदलाव से तमाम सामाजिक दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। अंग्रेजी वेबसाइट इंडिया स्पेंड में छपी रिसर्च के अनुसार पूर्व औद्योगिक काल यानी उद्योग लगने की शुरुआत से अब तक धरती के तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है। ये तापमान 2030 तक 1.5 डिग्री तक बढ़ सकता है।

रिसर्च में कहा गया है कि इससे दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया के गरीब मुल्कों में 25 अरब लोगों के लिए नईइ मुश्किलें हो सकती हैं। इनमें भारत जैसे मजबूत आर्थिक ताकत वाले देश के लोग भी शामिल होंगे। गर्मी बढ़ने से हिमालय की बर्फ कम हो जाएगी और पानी की दिक्कत होगी। साथ ही समुद्र का स्तर बढ़ेगा और बाढ़, तूफान, गरम हवा चलने और सूखे जैसी समस्याएं सामने आएंगी।

इन समस्याओं की वजह से समाज में विषमता बढ़ेगी और वर्ग संघर्ष शुरू हो सकते हैं। वर्ग संघर्ष का फायदा नक्सली आंदोलन को होगा और इस तरह देश के लिए नए किस्म का खतरा बढ़ता जाएगा। रिसर्च करने वालों ने इससे पहले हुई 2000 स्टडी के आंकड़ों के हवाले से ये दावा किया है। उन्होंने पाया कि भारत में जब भी सूखा पड़ता है, तो लोग नक्सली आंदोलन और सरकारी सुरक्षा बलों में खूब भर्ती होते हैं। इसके अलावा गरमी बढ़ने के कारण जो हालात बनते हैं, उससे खेती को भी नुकसान होता है और समाज के गरीब और अमीर तबके में विषमता भी बढ़ती है। इससे वर्ग संघर्ष की स्थितियां बनती हैं और नक्सलियों को अपने साथ लोगों को जोड़ने में सफलता मिलती है।

स्टडी के मुताबिक पर्यावरण में बदलाव से लोगों को अपना पैतृक घर और जमीन छोड़ने पर भी मजबूर होना पड़ता है। इससे शहरों में भीड़ बढ़ती है और जमीन के टुकड़े हासिल करने के लिए भी संघर्ष होते हैं। त्रिपुरा जैसे राज्य में इसकी बानगी देखी जा चुकी है। भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी वर्ग संघर्ष की घटनाओं को रिसर्च करने वालों ने पर्यावरण में हुए बदलाव से जुड़ा पाया है। वहीं, इंडोनेशिया में जब लोगों को समुद्रों से मछली मिलनी बंद हो गई और आय का ये स्रोत सिमटने लगा, तो वहां लूटपाट की घटनाएं ज्यादा होने लगीं।

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