आजकल युवा भी हो रहे आर्थराइटिस के शिकार, समय रहते बचाव जरूरी

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नई दिल्‍ली। आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में ऑस्टियो आर्थराइटिस की जगह मांसपेशियों के आर्थराइटिस के मामले ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं। मोटापा भी इसका एक अहम कारण है। मोटापे की वजह से घुटने पर ज्यादा वजन पड़ता है और लोग ऑस्टियो आर्थराइटिस की चपेट में आ रहे हैं। पहले आर्थराइटिस को बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन आजकल युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।

क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर ?

डॉक्‍टरों का कहना है कि आधुनिक लाइफ स्टाइल की वजह से अन्य बीमारियों के साथ-साथ आर्थराइटिस के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, भारत में कुल जनसंख्या का करीब 15 प्रतिशत किसी न किसी प्रकार के आर्थराइटिस से पीड़ित है। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 108 प्रकार के आर्थराइटिस पाए जाते हैं। इस बीमारी के करीब आधा दर्जन प्रकार ज्‍यादा लोगों में मिलते हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्‍या ऑस्टियो आर्थराइटिस से पीडि़त लोगों की है। इसके अलावा रूमेटाइट आर्थराइटिस, सेप्टिक आर्थराइटिस, जूवेनाइल आइडियोपैथिक आर्थराइटिस और गाउट प्रमुख हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले ऑस्टियो आर्थराइटिस के हैं। इसमें हाथ, पैर, कमर, घुटने और कूल्हे प्रभावित हो रहे हैं।

बच्चे भी हो रहे शिकार

आंकड़े बताते हैं कि आजकल के बच्चों में भी बीमारियों का ग्राफ बढ़ रहा है। आर्थराइटिस होने का कोई एक कारक तो नहीं होता, लेकिन शरीर में विभिन्न तत्वों की कमी की वजह से आजकल बच्चे भी आर्थराइटिस की चपेट में आ रहे हैं। इसका प्रमुख कारण बच्चों में कैल्शियम की कमी, लगातार कम्प्यूटर और टीवी पर बैठे रहना है। गलत पोस्चर में बैठकर देर तक पढ़ाई करना और अन्य कारक भी इसके लिए जिम्‍मेदार हैं।

इलाज के बारे में मिथ : डॉ. अतुल

फोर्टिस अस्पताल के आथोर्पेडिक के डायरेक्टर डॉ. अतुल मिश्रा का कहना है कि आमतौर पर गठिया के बारे में ऐसी धारणा है कि इससे निजात पाना संभव नहीं है। हालांकि यह सही नहीं है। आज की मेडिकल साइंस में तमाम तरह के ट्रीटमेंट उपलब्ध हैं, लेकिन यह जरूरी है कि मरीज समय से इलाज शुरू करा दें। डॉ. मिश्रा ने बताया कि मांसपेशियों का आर्थराइटिस आईटी डिपार्टमेंट के लोगों में सबसे ज्यादा बढ़ रहा है। इसका कारण यह है कि आईटी डिपार्टमेंट के लोग लगातार कम्प्यूटर पर काम करते। खासकर गलत पोस्चर में बैठने वालों को यह आर्थराइटिस जल्दी चपेट में ले लेता है।

क्या होता है आर्थराइटिस ?

आर्थराइटिस (गठिया) जोड़ों के दर्द की बीमारी है। अन्य बीमारियों और बदलती लाइफस्टाइल, मोटापा, गलत खान-पान की वजह से शरीर में जरूरी कारकों की कमी के चलते यह बीमारी चपेट में ले लेती है। आर्थराइटिस का सबसे अधिक प्रभाव घुटनों में और उसके बाद कूल्हे की हड्डियों में दिखाई देता है। बहुत लोग समय–समय पर अपने बदन में दर्द और अकड़न महसूस करते हैं। कभी–कभी उनके हाथों, कंधों और घुटनों में भी सूजन और दर्द रहता है तथा उन्हें हाथ हिलाने में भी तकलीफ होती है। ऐसे लोगों को आर्थराइटिस हो सकता है। दरअसरल, आर्थराइटिस जोड़ों के ऊतकों की जलन और क्षति के कारण होता है। जलन के कारण ही ऊतक लाल, गर्म, पीड़ा देने वाले और सूज जाते हैं। यह सारी समस्या यह दर्शाती है कि आपके जोड़ों में कोई समस्‍या है। जोड़ वह जगह होती है, जहां पर दो हड्डियों का मिलन होता है जैसे कोहनी या घुटना।

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