श्रीलंका की इस गुफा में रखा गया था रावण का शव ! यहां हैं रामायण से जुड़े 50 स्थल

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नई दिल्‍ली। बुराई पर अच्‍छाई की विजय का प्रतीक दशहरा यानी विजयदशमी  शुक्रवार (19 अक्‍टूबर) को देशभर में धूमधाम से मनाई जाएगी। मान्यता है कि नवरात्र की नवमी के अगले दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था, इसलिए इस दिन विजयदशमी मनाई जाती है।

श्रीलंका में रामायण से जुड़े कई स्‍थल

शोधकर्ताओं का मानना है कि श्रीलंका में आज भी रामायण से जुड़े कई ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं, जिनके बारे में हर कोई जानना चाहता है। श्रीलंका में कई ऐसे स्थान हैं, जो रामायण काल के इतिहास की गवाही देते हैं। बता दें कि शोधकर्ताओं ने रिसर्च में श्रीलंका में 50 ऐसे स्थल खोजने का दावा किया है जिनका संबंध रामायण से है। शोध में सामने आया है कि रावण का शव एक गुफा में रखा गया था, जो श्रीलंका के रैगला के जंगलों के बीच मौजूद है। श्रीलंका का इंटरनेशनल रामायण रिसर्च सेंटर और वहां के पर्यटन मंत्रालय ने मिलकर ये खोज की थी।

8 हजार फुट की ऊंचाई पर है गुफा

सभी जानते हैं कि जब भगवान श्रीराम और लंका नरेश रावण के बीच युद्ध हुआ था, तब राम के हाथों रावण का वध हुआ था। रावण के अंतिम संस्कार के लिए उसके शव को रावण के भाई विभीषण को सौंपा गया था। विभीषण को लंकाधिपति रावण का शव सौंपे जाने के बाद रावण का अंतिम संस्कार हुआ भी था या नहीं, इस बात को शायद कोई नहीं जानता है। ऐसा दावा किया जाता है कि यहां एक गुफा है, जहां रावण ने तपस्या की थी। इसे रावण की गुफा कहा जाता है। माना जाता है कि उसी गुफा में रावण का शव रखा गया था। रैगला के इलाके में यह गुफा 8 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित है।

50 स्थलों में से ये हैं शामिल

  • यहां घने जंगलों के बीच ‘रावण एल्ला’ नाम से एक झरना है, जो एक अंडाकार चट्टान से लगभग 25 मीटर की ऊंचाई से गिरता है।
  • रावण एल्ला को रावण की गुफा कहा जाता है। यहां सीता नाम से एक पुल भी है। यह गुफा समुद्र की सतह से 1,370 मी. की ऊंचाई पर स्थित है।
  • यहां की वेलीमड़ा नामक जगह पर डिवाउरूम्पाला मंदिर है। यह वही जगह है, जहां माता सीता ने अग्नि परीक्षा दी थी। स्थानीय लोग यहां सुनवाई करके न्याय करने के का काम करते हैं।
  • कैंडी से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित नम्बारा एलिया मार्ग पर एक तालाब मौजूद है, जिसे सीता टियर तालाब कहते हैं।
  • इसके बारे कहा गया है कि बेहद गर्मी के दिनों में जब आसपास के कई तालाब सूख जाते हैं तो भी यह कभी नहीं सूखता।
  • कहते हैं कि रावण जब सीता जी को हरण करके ले जा रहा था तो इसमें सीता जी के आंसू गिरे थे, इसीलिए आसपास का पानी तो मीठा है लेकिन इस का पानी आंसुओं जैसा खारा है।
  • यहां रावनागोड़ा नाम की जगह है। इस जगह पर कई गुफाएं और सुरंगें हैं। ये सुरंगें रावण के शहर को अंदर ही अंदर जोड़ती थी।
  • स्‍थानीय लोगों का मानना है कि कई सुरंगें तो दक्षिण अफ्रीका तक गई हैं, जिनमें रावण ने अपना सोना और खजाना छिपाया था। ये सुरंगें प्राकृतिक नहीं हैं, बल्कि बनाई गई हैं।
  • अनुसंधान के दौरान उस स्थान की भी तलाश पूरी कर ली गई है, जिस जगह पर भगवान राम व रावण के बीच भीषण व निर्णायक जंग हुई थी।
  • श्रीलंका में आज भी उस युद्घ स्थान को ‘युद्घागनावा’ नाम से जाना जाता है, जहां पर रावण का भगवान राम ने वध किया था।
  • अशोक वाटिका वो जगह है, जहां रावण ने माता सीता को रखा था। आज इस जगह को ‘सेता एलीया’ के नाम से जाना जाता है, जो नूवरा एलिया नामक जगह के पास स्थित है।
  • यहां आज सीता जी का मंदिर है और पास ही एक झरना भी है। कहते हैं इस झरने के आसपास की चट्टानों पर हनुमान जी के पैरों के निशान भी मिलते हैं।
  • यहां वो पर्वत भी है जहां हनुमान जी ने पहली बार कदम रखा था, इसे ‘पवाला मलाई’ कहते हैं। ये पर्वत लंकापुरा और अशोक वाटिका के बीच में है।

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