वैज्ञानिकों ने भारतीय बच्चों के खून को लेकर किया खतरनाक दावा, इस वजह से घट रही है बौद्धिक क्षमता

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टेक्सास । ऑस्‍ट्रेलिया में हुई एक ताजा रिसर्च ने भारतीय बच्‍चों के खून में बढ़ रही लेड की मात्रा पर चिंता जताई है। रिसर्च में सामने आया कि भारतीय बच्चों के खून में लेड की ज्यादा मात्रा से उनकी बौद्धिक क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो सकती है और इससे अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

ऑस्ट्रेलिया में मैकक्वेरी विश्वविद्यालय के रिसर्चर्स के मुताबिक आयुर्वेदिक औषधि के अलावा आईलाइनर, नूडल्स और मसाले सहित ऐसे अन्य पदार्थ बच्चों के खून में लेड का स्तर बढ़ाते हैं। रिसर्चर्स ने भारतीयों के खून में लेड के स्तर को लेकर अब तक का पहला बड़ा विश्लेषण किया है। विश्लेषण में पाया गया कि बीमारी का खतरा पहले के आकलन की तुलना में काफी बढ़ चुका है। इसका बच्चों में बौद्धिक अक्षमता के उपायों पर नकरात्मक असर पड़ता है।

मैकक्वेरी विश्वविद्यालय के ब्रेट एरिक्सन ने कहा कि भारत में रह रहे बच्चों में बौद्धिक क्षमता पर दुष्प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके खून में सीसे के मिश्रण का स्तर करीब सात माइक्रोग्राम प्रति डेसीलीटर है। रिसर्चर्स कि भारतीयों के रक्त में सीसे के उच्च स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि के लिये बैट्री गलन क्रिया जिम्मेदार है और भारत में बैट्री रिसाइकिल की प्रक्रिया की व्यवस्था ठीक नहीं है।

रिसर्च के अनुसार 2010 से 2018 के बीच खून में लेड के स्तर को बताने वाले आंकड़े से बौद्धिक क्षमता में कमी और रोगों के लिये जिम्मेदार डिसैबिलिटी अडजस्टेड लाइफ इयर्स (डीएएलवाई) का पता चलता है। डीएएलवाई से यह पता चलता है कि खराब स्वास्थ्य, अक्षमता और असमय मृत्यु के कारण हम कितने साल गंवा बैठे। पूर्व के अध्ययनों के अनुमान के अनुसार लेड से प्रेरित डीएएलवाई से 46 लाख लोग प्रभावित हुए और 165,000 लोगों की मौत हुई।

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