सर्वेक्षण में खुलासा : पढ़े-लिखे लोग भी एंटीबॉयटिक दवाओं के खतरों से अनजान

37 0

नई दिल्‍ली। हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण में सामने आया है कि न केवल अशिक्षित, बल्कि पढ़े-लिखे लोगों को भी एंटीबॉयटिक दवाओं के सही उपयोग और एंटीबॉयटिक प्रतिरोध के खतरों के बारे में जानकारी नहीं है।

किसने किया सर्वेक्षण ?

पुणे स्थित नेशनल केमिकल लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने यह सर्वेक्षण किया है। सर्वेक्षण में उन्‍होंने समाज के विभिन्न वर्गों के 504 लोगों को शामिल किया था। अध्ययनकर्ताओं ने पाया है कि शिक्षित लोग एंटीबॉयटिक दवाओं का सबसे अधिक उपयोग करते हैं। यह भी देखा गया कि इन लोगों में अपने आप दवा लेने की प्रवृत्ति भी अधिक होती है। यह सर्वेक्षण शोध पत्रिका ‘करंट साइंस’ में प्रकाशित हुआ है।

सर्वेक्षण में क्‍या आया सामने ?

शोधकर्ताओं ने पाया कि अध्‍ययन में शामिल 504 लोगों में से लगभग आधे (47 प्रतिशत) लोगों को ओवर-द-काउंटर (OTC) दवाओं और एंटीबॉयटिक दवाओं के बीच अंतर के बारे में पता नहीं था। बता दें कि ओटीसी दवाएं किसी डॉक्टर द्वारा पर्चे पर लिखे निर्देशों के बिना सीधे उपभोक्ता को बेची जाने वाली दवाओं को कहते हैं। वहीं, अध्ययन में शामिल एक चौथाई प्रतिभागियों का मानना था कि दवा की खुराक छूट जाने से एंटीबॉयटिक प्रतिरोध में कोई फर्क नहीं पड़ता। इसी तरह 10 प्रतिशत लोगों ने यह स्वीकार किया कि वे डॉक्टर से परामर्श लिए बिना खुद ही दवा लेते हैं। शोध पत्रिका करंट साइंस में प्रकाशित इस सर्वेक्षण के नतीजों के मुताबिक, 20 प्रतिशत लोग डॉक्टर के निर्देश और उपयुक्त परीक्षण के बिना दवाएं खरीदते हैं।

दवा स्ट्रिप पर लाल रंग का मतलब नहीं पता

सर्वेक्षण में शामिल पोस्ट ग्रेजुएट लोगों में से आधे से ज्यादा यह नहीं जानते थे कि दवा स्ट्रिप्स पर लाल रेखा का क्या मतलब होता है। दरअसल, ऐसी दवाएं डॉक्टर के परामर्श के बिना नहीं उपयोग करनी चाहिए। इन दवाओं को ओवर-द-काउंटर बिक्री की अनुमति भी नहीं है। स्नातक कर रहे 71 प्रतिशत और 58.5 प्रतिशत स्नातक लोग दवा स्ट्रिप्स पर ‘लाल रेखा’ के बारे में अनजान थे।कम शिक्षित लोगों की स्थिति तो और भी अधिक खराब थी। अशिक्षित लोगों में से किसी को भी दवा स्ट्रिप पर लाल रेखा के बारे में नहीं पता था।

प्रतिरोधक क्षमता की भी जानकारी नहीं

सर्वेक्षण में सामने आया कि अशिक्षित लोगों को बैक्‍टीरिया से होने वाले संक्रमण में एंटी-बॉयटिक दवाओं की भूमिका के बारे में ही पता नहीं था। वे ओटीसी तथा एंटीबॉयटिक में अंतर कर पाने में भी वे असमर्थ थे। उन्‍हें एंटीबॉयटिक दवाओं की प्रतिरोधक क्षमता के बारे में भी जानकारी नहीं थी। वायरल और बैक्‍टीरियल संक्रमण में अंतर के बारे में अशिक्षित लोगों को नहीं पता था और न ही वे यह जानते थे कि एंटीबॉयटिक दवाओं का उपयोग वायरल संक्रमण के उपचार में नहीं किया जाता है।

क्‍या कहना है शोधकर्ताओं का ?

अध्ययनकर्ताओं में शामिल डॉ. रघुनाथन का कहना है, ‘सर्वेक्षण के नतीजों से स्पष्ट होता है  कि लोगों को एंटीबॉयटिक दवाओं, उसके निपटारे और बिना सोचे-समझे उन दवाओं के उपयोग के बारे में शिक्षित किया जाना जरूरी है। शैक्षणिक और जन जागरूकता कार्यक्रमों के प्रसार के साथ-साथ एंटीबॉयटिक नियंत्रण नीतियों को बेहतर ढंग से लागू करने की आवश्यकता है, जो चिकित्सकीय पर्चे के बिना दवाओं की उपलब्धता को प्रतिबंधित करने में मददगार हो सकती हैं।’  सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि ज्यादातर लोग थोड़ा स्‍वस्‍थ होने पर नियमित दवा लेना छोड़ देते हैं या फिर पूरी तरह बंद कर देते हैं, जो सेहत के लिए ठीक नहीं है।

Related Post

शर्मनाक : नशे में धुत यात्री ने किया महिला की सीट पर पेशाब, एयर इंडिया ने मांगी माफी

Posted by - September 1, 2018 0
नई दिल्ली। एयर इंडिया की एक फ्लाइट में नशे में धुत एक यात्री ने कुछ ऐसा किया, जिसे जानकर आप…

राष्‍ट्रीय समस्‍या है ब्लू व्‍हेल गेम, लोगों को जागरूक करें टीवी चैनल : सुप्रीम कोर्ट

Posted by - October 27, 2017 0
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय प्रसारण चैनल दूरदर्शन और निजी चैनलों से कहा कि वे ब्लू वेल…

इंसान को बचाने के लिए अब वैज्ञानिक करने वाले हैं ऐसा, जानकर हो जाएंगे हैरान

Posted by - October 6, 2018 0
लंदन। इंसान जैसे-जैसे तरक्की कर रहा है, वैसे ही उसे तमाम गंभीर बीमारियों का सामना भी करना पड़ रहा है।…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *