रिसर्च : अब इस प्रणाली से बिना जीपीएस किसी की भी लोकेशन को कर सकेंगे ट्रैक

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वाशिंगटन। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी प्रणाली विकसित की है, जिसकी सहायता से अब जीपीएस के बिना भी किसी की लोकेशन का पता लगाया जा सकता है। इसके जरिए उस स्थान पर भी इंसानों और रोबोट का पता लगाया जा सकता है, जहां जीपीएस मौजूद नहीं है।

कैसे काम करता है यह ?

दरअसल, अमेरिका की सेना शोध प्रयोगशाला (ARL) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी एल्गोरिदम (गणित के सवालों को हल करने की नियम प्रणाली) विकसित की है, जो उस स्थान पर भी इंसानों और रोबोट का पता लगा सकती है जहां जीपीएस उपलब्ध नहीं है। इन वैज्ञानिकों में भारतीय मूल की भी एक वैज्ञानिक गुंजन वर्मा शामिल हैं। गुंजन वर्मा ने कहा, ‘यह प्रणाली काफी अहम है क्योंकि इससे सैनिकों और इंसानों तथा रोबोट को एक साथ मिलकर काम करने में मदद मिलेगी।’

कैसे साबित होगा मददगार ?

एआरएल के वैज्ञानिक फिकदु दागेफु ने कहा कि किसी प्राकृतिक आपदा से जीपीएस के लिए आवश्यक ढांचा (जैसे सैटेलाइट) बर्बाद हो सकता है या फिर किसी इमारत के भीतर जीपीएस के सिग्नल आने में मुश्किल हो सकती है। ऐसे समय में इस एल्गोरिदम की मदद से बिना जीपीएस के भी लोकेशन का पता लगाया जा सकता है। वहीं गुंजन वर्मा कहती हैं, ‘ज्यादातर असैन्य उपकरण जैसे कि जीपीएस इस संबंध में अच्छी तरह काम करते हैं और हमारी मदद करते हैं। उदाहरण के लिए, हमारी कार के जरिए गंतव्य तक पहुंचने में मदद करना। हालांकि सैन्य माहौल के लिए ये प्रणालियां उचित नहीं हैं।’

क्‍या होता है जीपीएस ?

जीपीएस (GPS) का फुल फॉर्म होता है ‘Global Positioning System’। GPS एक Global Navigation Satellite System  है जो किसी भी चीज की लोकेशन पता करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस सिस्टम को सबसे पहले अमेरिका के रक्षा विभाग ने 1960 में बनया था। उस समय यह सिस्टम सिर्फ अमेरिकी सेना इस्तेमाल करती थी, लेकिन बाद में 27 अप्रैल, 1995 को इसे सभी के लिए बनाया गया। आज हमें ये हमारे मोबाइल में भी देखने को मिलता है। इस तकनीक का सबसे ज्यादा इस्तेमाल आज Navigation या रास्ता ढूंढने के लिए किया जाता है। इसकी मदद से हम अपनी लोकेशन से किसी दूसरी लोकेशन की दूरी भी बहुत आसानी से पता कर सकते हैं।

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