डॉक्टरों का करिश्मा : देश में पहली बार खोपड़ी ट्रांसप्लांट कर बचाई मासूम की जान

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पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में डॉक्‍टरों ने एक ऐसा करिश्‍मा किया है, जिसकी जितनी भी तारीफ की जाए वह कम होगी। दरअसल, यहां के डॉक्‍टरों ने एक 4 साल की बच्ची की खोपड़ी ट्रांसप्लांट कर उसे जीवनदान दिया है। देश में पहली बार इस तरह की सर्जरी की गई है। इस ऑपरेशन को देश का पहला स्कल ट्रांसप्लांट बताया जा रहा है।

क्‍यों करनी पड़ी सर्जरी ?

दरअसल, पिछले साल मई में पुणे में रहने वाली 4 साल की बच्ची का सिर एक सड़क हादसे में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। बच्ची की खोपड़ी को काफी नुकसान पहुंचा था। उस वक्त बच्ची की दो बड़ी सर्जरी की गई थीं, जो काफी मुश्किल थीं। इन सर्जरी के बाद बच्‍ची को घर भेज दिया गया था, लेकिन उसे आराम नहीं मिला। इसके बाद इस साल बच्ची को स्‍कल ट्रांसप्लांट के लिए दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया।

कैसे की गई सर्जरी ?

बच्ची की खोपड़ी को ट्रांसप्‍लांट करने के लिए डॉक्टरों ने 3डी पॉलिथीन बोन का इस्‍तेमाल किया। इस पॉलिथीन बोन को अमेरिका की एक कंपनी ने खास बच्ची की खोपड़ी के आकार को देखकर डिजाइन किया था। डॉक्टरों ने 4 साल की बच्ची के 60 फीसदी डैमेज हो चुके खोपड़ी की जगह ऑपरेशन कर थ्री-डायमेंशनल इंडीविजुअलाइज पॉलिथीन बोन लगाई है।

क्‍या कहना है डॉक्‍टर का ?

बच्ची का इलाज करने वाले भारती अस्पताल के डॉ. जितेंद्र ओस्वाल का कहना है कि एक्‍सीडेंट का असर बहुत ही घातक था। उसे अचेत अवस्था में अस्पताल में लाया गया था। उसके सिर से बहुत खून निकल रहा था। उसे तुरंत वेंटिलेटर पर रखा गया। सीटी स्कैन में पता चला कि उसकी स्कल के पीछे की हड्डी (ऑप्टिकल स्कल) में फ्रैक्चर आया है जिसके चलते वह सूज गई है। इसका प्रभाव मस्तिष्क पर पड़ता है। इसके कारण मस्तिष्क में तरल पदार्थ यानी एडीमा का अधिक संचय हुआ। कृत्रिम वेंटीलेशन और दवाओं से जब एडीमा कम नहीं हुआ तो सर्जरी करनी पड़ी। सर्जरी के बाद बच्ची की हालत में सुधार है। पुणे के कोथुर्ड में रहने वाली बच्ची के पिता स्कूल बस चलाते हैं और मां गृहिणी हैं। बच्ची की मां ने बताया कि वह अब स्कूल जा रही है और दोस्तों के साथ खेल-कूद रही है। बच्ची अब पहले की तरह ही खुश है।

अमेरिका में हुआ था दुनिया का पहला स्‍कल ट्रांसप्‍लांट

ट्रांसप्लांट सर्जरी के क्षेत्र में अमेरिकी डॉक्टरों ने दुनिया का पहला स्‍कल ट्रांसप्लांट किया था। 55 वर्षीय जेम्स बॉयसन को कैंसर के इलाज के दौरान सिर में गहरा जख्म आ गया था। इसके बाद डॉक्‍टरों ने स्‍कल ट्रांसप्लांट का फैसला किया। एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर और ह्यूस्टन मेथोडिस्ट हॉस्पिटल में 22 मई, 2015 को यह सफल सर्जरी की गई। डॉक्‍टरों ने 15 घंटे में इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। सर्जरी टीम का नेतृत्व करने वाले डॉ. माइकल क्लेबक का कहना था कि यह नाडियों से जुड़ी बहुत जटिल प्रक्रिया थी। ऐसा ट्रांसप्लांटेशन पहले कभी सामने नहीं आया।

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