वैज्ञानिकों ने दिया भारत को दो अलग टाइम जोन में बांटने का सुझाव

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नई दिल्‍ली। देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में भारतीय मानक समय (Indian Standard Time) पर आधारित आधिकारिक कामकाजी घंटों से पहले सूर्य उगता और अस्त होता है। सर्दियों में दिन के उजाले के घंटे कम हो जाते हैं क्योंकि सूरज और भी जल्दी अस्त हो जाता है। इसका उत्पादकता और बिजली की खपत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में कहा गया है कि यदि भारत को दो समय क्षेत्रों में बांट दिया जाए तो इस स्थिति में सुधार हो सकता है।

क्‍या दिया गया सुझाव ?

आईएसटी का निर्धारण करने वाली राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL) के एक नए विश्लेषण के आधार पर असम, मेघालय, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और अंडमान निकोबार द्वीप समूह को अलग समय क्षेत्र (टाइम जोन) में बांटने का सुझाव दिया गया है। बता दें कि पूर्वोत्तर राज्यों के सांसद और कई अन्य समूह काफी समय से एक अलग समय क्षेत्र की मांग कर रहे हैं। असम के चाय बागानों में तो लंबे समय से ‘चायबागान समय’ का पालन हो रहा है, जो आईएसटी से एक घंटा आगे है।

कैसे बांटेंगे समय क्षेत्र ?

शोध पत्रिका ‘करंट साइंस’ में प्रकाशित इस नए अध्ययन के अनुसार, भारत में दो समय क्षेत्रों की मांग पर अमल करना तकनीकी रूप से संभव है। दो भारतीय मानक समय (IST) को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटा जा सकता है। देश के विस्तृत हिस्से के लिए IST-I और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए IST-II को एक घंटे के अंतर पर अलग-अलग किया जा सकता है। फिलहाल भारत में 82 डिग्री 33 मिनट पूर्व से होकर गुजरने वाली देशांतर रेखा पर आधारित एक समय क्षेत्र है। नए सुझाव के अंतर्गत यह क्षेत्र IST-1 बन जाएगा, जिसमें 68 डिग्री 7 मिनट पूर्व और 89 डिग्री 52 मिनट पूर्व के बीच के क्षेत्र शामिल होंगे। इसी तरह, 89 डिग्री 52 मिनट पूर्व और 97 डिग्री 25 मिनट पूर्व के बीच के क्षेत्र को IST-2 कवर करेगा। इसमें सभी पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ अंडमान और निकोबार द्वीप भी शामिल होंगे।

वैज्ञानिकों ने ऐसे दिया है भारत को IST-1 और IST-2 में बांटने का सुझाव

क्‍यों दिया गया ऐसा सुझाव ?

वैज्ञानिकों द्वारा पूर्वोत्तर के लिए अलग समय क्षेत्र सुझाने के कई कारण हैं। इनमें लोगों की जैविक गतिविधियों पर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का प्रभाव और कार्यालय के घंटों को सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के साथ अनुकूल बनाना शामिल हैं। दो समय क्षेत्रों का प्रबंधन भी किया जा सकता है। एनपीएल के निदेशक डॉ. डीके असवाल का कहना है, ‘दो समय क्षेत्रों के सीमांकन में परेशानी नहीं होगी क्योंकि सीमांकन क्षेत्र काफी छोटा होगा जो पश्चिम बंगाल और असम की सीमा पर होगा। समय समायोजन के लिए केवल दो रेलवे स्टेशनों – न्यू कूच बिहार और अलीपुरद्वार को मैनेज करने की आवश्यकता होगी। चूंकि सिग्नलिंग सिस्टम अभी पूरी तरह से स्वचालित नहीं हैं, इसलिए दो समय क्षेत्रों की वजह से रेलवे परिचालन में बाधा नहीं होगी।’

कैसे संभव होगा यह ?

डॉ. असवाल के अनुसार, ‘वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के अंतर्गत काम करने वाली नई दिल्ली स्थित प्रयोगशाला एनपीएल आईएसटी की उत्पत्ति और प्रसार के लिए जिम्मेदार है। यहां पर फ्रांस के इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेजर्स (BITM) में स्थित यूनिवर्सल टाइम कोर्डिनेटेड (UTC) के साथ समेकित घड़ियों का एक समूह है। दूसरे समय क्षेत्र के लिए एनपीएल को पूर्वोत्तर में एक और प्रयोगशाला स्थापित करनी होगी और इसे UTC के साथ सिंक करना होगा। हमारे पास देश में दो भारतीय मानक समय प्रदान करने की क्षमता है। दो समय क्षेत्रों के होने पर भी दिन के समय के साथ मानक समय को संयोजित किया जा सकता है।’

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