साबरमती नदी को प्रदूषित कर रही है माइक्रोप्लास्टिक, IIT स्टूडेंट्स की स्टडी में आया सामने

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अहमदाबाद। साबरमती नदी में माइक्रोप्लास्टिक पाए गए हैं। ये इतने छोटे होते हैं कि आंखों से नजर नहीं आते हैं। छोटे होने की वजह से ये वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट से भी गुजर जाते हैं। इसकी वजह से पीने वाले पानी में भी माइक्रोप्लास्टिक के पहुंचने का डर है। IIT गांधीनगर के अर्थ साइंस के स्टूडेंट्स ने शहर की नदी में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक पर स्टडी की है।

रिसर्च में चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जैसे ही ये माइक्रोप्लास्टिक साबरमती नदी से होकर पिराना डंप और सीवेज डिस्‍चार्ज प्वाइंट पर पहुंचते हैं, ये नजर आना शुरू हो जाते हैं। टीम को ढेर सारे 4.71 मिलीग्राम के माइक्रोप्लास्टिक मिले। इसके अलावा उन्हें पिराना पर 4 ग्राम के माइक्रोप्लास्टिक भी मिले। इस रिपोर्ट को श्रीलंका में हुए 6th इंटरनेशनल सिम्पोजिअम में भी दिखाया गया था।

आईआईटी-जीएन के अर्थ विज्ञान के प्रोफेसर मनीष कुमार का कहना है कि शहर में मौजूद सेटअप की वजह से माइक्रोप्‍लास्टिक्स की समस्या आ रही है। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद में वेस्ट डिस्पोजल सिस्टम ठीक नहीं है और ना ही वेस्ट मैनेजमेंट ढंग से है। इस शोध को प्रोफेसर कुमार ने अपने छात्रों अरबिंद कुमार पटेल, अनंत अग्रवाल, भागवाना राम और राहुल उपाध्याय के साथ मिलकर किया है।

अमेरिका की एक रिसर्च कंपनी का कहना है कि एक पॉलिएस्टर फ्लीस जैकेट को धोने पर कम से कम 1900 प्लास्टिक फाइबर निकलते हैं। प्लास्टिक माइक्रोप्लास्टिक का सबसे ज्यादा इस्तेमाल टूथपेस्ट, शैंपू और शॉवर जेल में होता है। इन माइक्रोप्लास्टिक को प्राथमिक या माध्यमिक उपचार संयंत्र से निकाला नामुमकिन होता है।

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