दिल्ली: स्कूल में धर्म के आधार पर बांटे गए छात्र, हिंदू-मुस्लिम छात्रों को अलग-अलग बिठाया

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नई दिल्ली।शिक्षा के मंदिर में धार्मिक आधार पर भेदभाव करने की इजाजत न तो हमारा समाज देता है और न ही संविधान, फिर भी ऐसी घटनाएं जब-तब सामने आती रहती हैं। ताजा मामला राजधानी दिल्ली का है। यहां उत्तर दिल्ली नगर निगम द्वारा नियोजित शिक्षकों के एक वर्ग ने आरोप लगाया है कि वजीराबाद में एक प्राथमिक विद्यालय विभिन्न वर्गों में हिंदू और मुस्लिम छात्रों को अलग कर रहा है। इंडियन एक्सप्रेस के पास 9 अक्टूबर तक के उत्तरी एमसीडी बॉयज स्कूल, वजीराबाद गांव, गली नंबर 9 के उपस्थिति रिकॉर्ड हैं, जिससे ये बात साबित होती है।

विभिन्न सेक्शनों में इस तरह बांटे गए छात्र
क्लास 1A- 47 हिन्दू, 1B- 36 मुस्लिम
क्लास 2A- 47 हिन्दू, 2B- 26 मुस्लिम और 15 हिन्दू, 2C- 40 मुस्लिम
क्लास 3A- 40 हिन्दू, 3B- 23 हिंदू और 11 मुस्लिम, 3C- 40 मुस्लिम, 3D- 14 हिंदू और 23 मुस्लिम
क्लास 4A- 40 हिंदू, 4B- 19 हिंदू और 13 मुस्लिम, 4C- 35 मुस्लिम, 4D- 11 हिंदू और 24 मुस्लिम
क्लास 5A- 45 हिंदू, 5B- 49 हिंदू, 5C- 39 मुस्लिम और 2 हिंदू, 5D- 47 मुस्लिम

एमसीडी स्कूल केवल कक्षा 5वीं तक शिक्षा प्रदान करते हैं। Right To Education Act के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर हर सेक्शन में 30 छात्र होने चाहिए। शिक्षक प्रभारी सी बी सिंह सहरावत ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा, ‘वर्गों में फेरबदल मानक प्रक्रिया है जो सभी स्कूलों में होती है। यह प्रबंधन निर्णय था। स्कूल में शांति, अनुशासन और अच्छा सीखने का माहौल बनाने के लिए हम सबसे अच्छा प्रयास कर सकते हैं। कभी-कभी बच्चे लड़ते थे। उन्होंने कहा, ‘निश्चित रूप से बच्चे इस उम्र में धर्म के बारे में नहीं जानते हैं, लेकिन वे कुछ चीजों पर तकरार करते हैं। कुछ बच्चे शाकाहारी हैं, इसलिए मतभेद हो सकते हैं। हमें सभी शिक्षकों और छात्रों के हितों की देखभाल करने की आवश्यकता है।’

स्कूल के एक सूत्र ने कहा कि धर्म पर आधारित सेक्शंस में फेरबदल सहारावत द्वारा जुलाई में प्रभार संभालने के बाद शुरू हुआ। अकादमिक सत्र अप्रैल में शुरू हुआ। 2 जुलाई को प्रिंसिपल का ट्रांसफर कर दिया गया, जिसके बाद एक शिक्षक को तब तक चार्ज दिया गया जब तक कि एक नया प्रिंसिपल पोस्ट नहीं किया जाता। उन्होंने इन परिवर्तनों की शुरुआत की और इस मामले में शिक्षकों से परामर्श नहीं किया गया। जब कुछ शिक्षकों ने उनसे इस बारे में बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने आक्रामकता से जवाब दिया और उनसे कहा कि यह उनकी चिंता नहीं है और उन्हें अपनी नौकरी करनी चाहिए।

सूत्र के मुताबिक, स्कूल के कुछ शिक्षक इस बारे में अधिकारियों को बताने के लिए सिविल लाइंस में एमसीडी क्षेत्रीय कार्यालय गए थे, लेकिन उन्होंने डर की वजह से अपनी शिकायतों को लिखित में नहीं रखा। दिल्ली के उत्तर नगर निगम के शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘अब यह हमारे नोटिस में लाया गया है, हम निश्चित रूप से इसके बारे में पूछेंगे। अगर आरोप सही हैं, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।’ कक्षा 1 के छात्र की मां का कहना है कि मुझे इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं थी। अगर ये सच है तो यह बहुत गलत बात है। हमारा मानना है कि सारे बच्चे बराबर हैं। अगर स्कूल में ही ऐसा किया जा रहा है तो यह तो यह बहुत चिंताजनक है।

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