अध्‍ययन में खुलासा : हृदय रोगियों के लिए मैकेनिकल से ज्यादा बेहतर है टिशू वॉल्व

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नई दिल्‍ली। देश में पहली बार टिशू वॉल्व पर 10  अलग-अलग अस्पतालों में 100 मरीजों पर अध्‍ययन के बाद हृदय रोग विशेषज्ञ इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि दिल के मरीजों में मैकेनिकल वॉल्व की तुलना में टिशू वॉल्व ज्यादा फायदेमंद है। इस अध्‍ययन से यह भी साबित हो गया है कि टिशू वॉल्व भारतीय मरीजों के लिए भी उतना ही फायदेमंद है, जितना पश्चिमी देशों के मरीजों के लिए।

क्‍यों बदलते हैं हार्ट वाल्व ?

इंसान के हृदय में झिल्लीनुमा संरचना वाले चार हार्ट वाल्‍व होते हैं। चार कक्षों वाले हमारे हृदय में वाल्‍व का काम लगातार एक दिशा में रक्‍त संचार को बनाए रखना होता है। वाल्‍व ऊपरी और निचले कक्षों के प्रवेश और निकास द्वार पर मौजूद रहते हैं। ये ब्‍लड को आगे प्रवाहित करते हैं और उसे पीछे लौटने से रोकते हैं। ये फोल्‍ड होने के साथ ही बंद भी हो जाते हैं। हार्ट वाल्‍व बहुत ही नाजुक होते हैं। जब हार्ट वाल्‍व किसी कारण से क्षतिग्रस्‍त या रोगग्रस्‍त हो जाते हैं तो हार्ट वाल्‍व रिपेयर या रिप्‍लेसमेंट सर्जरी की जाती है।

दो तरह के होते हैं वाल्‍व

पूरी दुनिया में दिल के मरीजों के लिए दो प्रकार के वॉल्व मौजूद हैं – एक मेटल का बना मैकेनिकल और दूसरा टिशू वॉल्व।  टिशू वाल्‍व जानवर के टिशू का बना होता है। दुनिया भर में हुए अध्‍ययन के बाद यह निष्‍कर्ष सामने आया है कि दिल के मरीजों में मैकेनिकल वॉल्व की तुलना में टिशू वाल्‍व ज्यादा फायदेमंद हैं। पहली बार अपने देश में भी इस पर शोध हुआ और कार्डिएक सर्जन इसी नतीजे पर पहुंचे हैं।

कुछ दिनों बाद नहीं खानी पड़ती दवा

अध्‍ययन में शामिल नई दिल्‍ली के मैक्स हॉस्पिटल के कार्डिएक सर्जन डॉ. रजनीश मल्होत्रा कहते हैं कि इसमें कोई दो राय नहीं कि मैकेनिकल वॉल्व की लाइफ ज्यादा होती है, लेकिन इसके साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इसमें पूरी जिंदगी खून पतला करने वाली दवा खानी पड़ती है। साथ ही हर महीने ब्‍लड टेस्ट कराना होता है। इससे मरीजों को काफी परेशानी होती है। दूसरी तरफ, टिशू वॉल्व लगाने के 6 महीने के बाद किसी तरह की दवा नहीं खानी पड़ती।

कितनी होती है लाइफ ?

डॉ. रजनीश कहते हैं कि सुदूर गांव या कस्बे में रहने वाले लोगों के लिए टिशू वाल्‍व ज्‍यादा फायदेमंद है, क्‍योंकि वे पूरी जिंदगी दवा नहीं खा पाते। वे हर महीने ब्‍लड टेस्ट भी नहीं करा पाते। ये दिक्कत तब और बढ़ जाती है, जब गांव या कस्बे में ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट गलत दे दी जाती है। डॉक्‍टरों का कहना है कि टिशू वाल्‍व बहुत सेफ है। जहां तक टिशू वॉल्व की लाइफ की बात है तो डॉक्टर बताते हैं कि यंग मरीजों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है और वो आसानी से 15 से 20 साल तक इससे ठीक रहेंगे। इसके बाद अगर जरूरत होगी तो टिशू वॉल्व दोबारा लगाया जा सकता है।

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