नींद की कमी से दिल की बीमारियों का खतरा दोगुना, समय से पहले हो जाएंगे बूढ़े

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नई दिल्ली। डॉक्‍टरों का कहना है कि अगर आपको अपनी सेहत ठीक रखनी है तो पर्याप्‍त नींद लेना जरूरी है, लेकिन आज की भागदौड़ वाली जिंदगी में शायद कुछ ही लोग होंगे जो पूरी नींद ले पाते हों। एक अध्ययन के मुताबिक, पिछले 50 सालों में हमारी औसत नींद में डेढ़ घंटे की कमी आई है। हृदय के लिए सबसे खतरनाक कारकों में नींद की कमी का नंबर पहला है। हाल ही में हुए एक अध्‍ययन में पता चला है कि अपर्याप्‍त नींद दिल को समय से पहले बूढ़ा बनाकर हमारे स्वस्थ रहने की उम्मीदों पर पानी फेर देती है। ऐसे लोगों में दिल की बीमारियों का खतरा दोगुना हो जाता है।

क्‍या कहा गया अध्‍ययन में ?

एक अध्ययन में पाया गया कि अपर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम का अभाव, मधुमेह, धूम्रपान और उच्च रक्तचाप हमारे हृदय के लिए सबसे खतरनाक कारक हैं। इसमें भी नींद में कमी या अधिकता को हृदय के लिए सबसे खतरनाक माना गया। बदलती जीवनशैली और खानपान के बीच आधी अधूरी नींद या बहुत ज्यादा सोना हमारे हृदय को, हमारे शरीर से पहले ही बूढ़ा कर रहा है जो बहुत ही खतरनाक संकेत है।

कैसे किया अध्‍ययन ?

शोधकर्ताओं ने एक जयपुर के एक अस्पताल में पिछले दो महीने में 576 लोगों पर अध्ययन किया। उन्‍होंने अध्‍ययन में पाया कि आधे से अधिक लोगों का हृदय उनकी खुद की उम्र से 10-33 साल अधिक बूढ़ा हो चुका है। हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, इस अध्ययन में पाया गया कि हर दिन 7 घंटे से कम और 9 घंटे से ज्यादा सोने वालों के हृदय को सबसे अधिक खतरा है और उनमें कोरोनरी हार्ट डिजीज (CHD) की आशंका ज्यादा है। ऐसे लोगों में हाई बीपी, डायबिटीज, मोटापा, शारीरिक सक्रियता में कमी पाई गई। वहीं 5 घंटे से कम सोने वालों में 71 साल की उम्र तक दिल की बीमारियों का खतरा दोगुना पाया गया।

औसत नींद में आई डेढ़ घंटे की कमी

हाल ही में एक अध्ययन में कहा गया था कि हमारी औसत नींद में बीते 50 साल में लगभग डेढ़ घंटे की कमी आई है। दूसरे शब्‍दों में हम अब तुलनात्मक रूप से कम सोते हैं। स्वस्थ हृदय के लिए पर्याप्त और अच्छी नींद बहुत मायने रखती है। अच्छी नींद से मतलब है कि आदमी सुकून से सोए। उसकी नींद इतनी गहरी हो कि मोबाइल की बैटरी, व्हाटसएप के मैसेज और ईमेल की चिंता उसमें खलल न डाल सके।

बढ़ रहे हृदय रोग के मामले

देश में दिल की बढ़ती बीमारियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2025 तक हार्ट अटैक से होने वाली मौत की दर प्रति लाख आबादी पर 295 हो जाने का अनुमान है। ऐसी आशंका है कि साल 2025 तक हृदयवाहिनी (कार्डियोवैस्क्यूलर) रोग सर्वाधिक जानलेवा रोग बन जाएगा। डॉक्टरों का कहना है कि चैन की नींद, हमारे हृदय को स्वस्थ रखते हुए उसकी उम्र बढ़ा सकती है जो इंसान के स्वस्थ जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होगी। डॉक्टरों के अनुसार, हर दिन आधे घंटे का व्यायाम, शाम को चाय व काफी से दूरी और एक दिन में कम से कम 7 घंटे की नींद हमारे दिल के स्वस्थ रहने के लिए काफी है। उन्होंने कहा कि अगर हृदय स्वस्थ रहे तो 75 साल से कम आयु के लोगों में दिल के दौरे और हृदयाघात के मामलों में 80 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।

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