सेहतमंद रहना है और वजन कम करना है तो कोको पाउडर से बेहतर कुछ भी नहीं

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लंदन। शायद कम ही लोग जानते होंगे कि जिस कोको बीन्स से चॉकलेट बनाई जाती है, वह सेहत के लिए काफी लाभदायक है। शोध बताते हैं कि आहार में मौजूद वसा को हमारा शरीर तेजी से ऊर्जा में बदलता है, जिससे मेटाबॉलिज्म की दर बढ़ जाती है। लंबे समय तक शारीरिक श्रम न करें तो शरीर में मौजूद वसा ऊर्जा में नहीं बदल पाती और वह धीरे-धीरे चर्बी के रूप में शरीर में इकट्ठा होने लगती है। ब्रिटेन में किए गए एक शोध में पता चला है कि कोको पाउडर भी शरीर में मौजूद वसा को तेजी से ऊर्जा में बदलने का काम करता है।

कोको पाउडर पोषक तत्‍वों का भंडार

दरअसल, कोको बीन्स को खूब महीन पीसकर कोको पाउडर बनाया जाता है, जो कई स्वादिष्ट व्यंजनों और चॉकलेट बनाने में काम आता है। कोको पाउडर अपने पोषक गुणों की वजह से सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। कोको पाउडर में कैल्शियम, मिनरल्स, मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक के अलावा कुछ खास किस्म के फ्लैवोनॉइड्स पाए जाते हैं, जो हमारी सेहत के लिए काफी अहम होते हैं। लगभग 2 चम्मच कोको पाउडर में मात्र 25 कैलोरी, 1.5 ग्राम फैट और 3.6 ग्राम फाइबर होता है।

ब्‍लडप्रेशर सामान्‍य रखने में मददगार

शोधकर्ताओं का कहना है कि कोको पाउडर में मौजूद फ्लैवोनॉइड्स, रक्त में पाए जाने वाले नाइट्रिक ऑक्साइड के स्तर को सुधारते हैं। इससे रक्त वाहिकाएं ज्यादा बेहतर ढंग से काम कर पाती हैं, जिससे रक्त का प्रवाह ठीक रहता है और उच्च रक्तचाप की समस्या नहीं होती। विभिन्न शोध यह भी बताते हैं कि कोको पाउडर में मौजूद फ्लैवोनॉइड्स की मात्रा रक्तचाप को सामान्य कर देती है। परिणामस्‍वरूप हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दिल से जुड़ी अन्य बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है।

कम करता है बैड कोलेस्‍ट्रॉल और तनाव

कोको पाउडर में कुछ ऐसे गुण भी पाए जाते हैं, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाकर रक्त को हृदय तक बेहतर ढंग से पहुंचाने में मदद करते हैं। ऐसा इसमें मौजूद फ्लैवोनॉइड्स की वजह से हो पाता है। इसकी एक बढि़या खूबी यह भी है कि इसके सेवन से मूड काफी अच्छा हो जाता है। दरअसल, कोको पाउडर में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो मस्तिष्क को सचेत और मूड को अच्छा बनाते हैं। इसके सेवन से खासतौर पर हमारे शरीर में सैरोटोनिन का स्तर बढ़ जाता है, जो तनाव को कम करने में बहुत मददगार होता है।

अस्‍थमा में पहुंचाए फायदा

ऐसा माना जाता है कि कोको पाउडर अस्थमा से प्रभावित लोगों को विशेष रूप से लाभ पहुंचाता है, क्योंकि इसमें थियोफेलाइन और थियोब्रोमाइन नामक तत्व पाए जाते हैं। ये दोनों ही तत्‍व अस्थमा को रोकने का काम करते हैं। थियोब्रोमाइन, कैफीन की तरह काम करता है और अस्थमा में होने वाली लगातार खांसी से राहत दिलाता है। इसी प्रकार थियोफेलाइन, फेफड़ों को आराम पहुंचाता है और सांस लेना आसान बनाता है।

कैंसर की रोकथाम में सहायक

कई शोध ये भी बताते हैं कि कोको पाउडर के सेवन से ब्रेस्ट कैंसर, कोलोन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और लिवर कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। इसमें ऐसे फ्लैवोनॉइड्स की बहुत उच्च मात्रा पाई जाती है, जो कैंसर रोकने में बहुत कारगर होते हैं। ये फ्लैवोनॉइड्स ना केवल स्वस्थ सेल्स को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि कैंसर को बढ़ने से भी रोकते हैं। इस पाउडर में मौजूद पोषक तत्वों का पूरा फायदा लेने के लिए प्रतिदिन कम से कम 2.5 ग्राम हाई फ्लैवोनॉइड्स युक्त कोको पाउडर का सेवन करना चाहिए। आप चाहें तो 10 ग्राम हाई फ्लैवोनॉइड्स डार्क चॉकलेट भी खा सकते हैं, जिसमें करीब 200 मिलिग्राम फ्लैवोनॉइड्स होते हैं। ये सेहत की दृष्टि से काफी फायदेमंद हैं।

दांतों की भी सुरक्षा

सामान्‍यत: यह माना जाता है कि चॉकलेट खाने से दांत खराब हो जाते हैं। बच्चों को तो उनके माता-पिता अक्‍सर डांटते रहते हैं कि चॉकलेट मत खाओ। लेकिन कोको पाउडर में कुछ ऐसे खास एंटी बैक्टीरियल और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाले गुण होते हैं, जो न केवल दांतों में सड़न पैदा होने से रोकते हैं, बल्कि दांतों की सेहत भी बनाए रखते हैं।

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