टीबी की बीमारी को मिटाना है, तो केरल के इडुक्की से सीखिए तरीका

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इडुक्की (केरल)। साल 2006 में ट्यूबरकुलोसिस जैसी गंभीर बीमारी से केरल का इडुक्की जिला जूझ रह था। अपने पर्यटन स्थलों के लिए इडुक्की दुनियाभर में प्रसिद्ध है, लेकिन टीबी जैसी खतरनाक बीमारी यहां के लोगों में घर कर रही थी। अब हालात बदल चुके हैं। इडुक्की ने दिखा दिया है कि जहां चाह होती है, वहां राह जरूर निकलती है।

जिले में अब हर एक लाख लोगों पर महज 17 लोगों में ही टीबी की बीमारी पी जा रही है। हालांकि, साल 2006 से साल 2009 तक यहां हर एक लाख में टीबी की बीमारी से ग्रस्त औसतन 138 लोग पाए जाते थे। टीबी के मरीजों की संख्या घटाने में इडुक्की के सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों का बहुत बड़ा हाथ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दूर-दराज के गांवों में भी हर एक शख्स तक जांच का काम किया गया और टीबी के मरीजों की पहचान की गई।

इडुक्की जिले में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की हालत बहुत खराब थी। आमतौर पर केरल में 1995 में हर एक लाख की आबादी पर 143 सरकारी अस्पताल के बेड थे, लेकिन इडुक्की में ये महज 93 ही थे। साल 2013 में इडुक्की में 177 सरकार डॉक्टर भी हुआ करते थे। इनकी संख्या में इजाफा कर टीबी की बीमारी से निपटने में सरकारी तंत्र सफल हुआ।

इडुक्की में साल 2006 में हालत ये थी कि टीबी के मरीजों की जांच के लिए 21 केंद्र तो थे, लेकिन उनमें टेस्ट करने वाले टेक्नीशियन की भारी कमी थी। ऐसे में हर एक लाख की आबादी पर महज 500 लोगों की ही जांच हो पा रही थी। सरकार ने इसे देखते हुए मेडिकल टेक्नीशियन्स की भर्ती की और 2015 तक हर एक लाख की आबादी पर 1400 लोगों की जांच होने लगी।

इडुक्की में स्थित निजी अस्पतालों और प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों ने भी टीबी की बीमारी को जड़ से खत्म करने मे खासा योगदान दिया। कुल मिलाकर 2017 में टीबी के कुल मामलों में से 20 फीसदी की जानकारी निजी अस्पतालों और डॉक्टरों से ही मिली।

बता दें कि साल 2007 से 2009 तक इडुक्की में टीबी के मामले लगातार बढ़ते रहे। साल 2007 में जिले में 644 मरीजों का पता चला। साल 2009 में मरीजों की संख्या बढ़कर 747 हो गई। इसके बाद हर साल 4 फीसदी की दर से मरीजों की संख्या घटनी शुरू हो गई। कुल मिलाकर इडुक्की ने दिखा दिया कि सरकारी के साथ निजी अस्पतालों और प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों की मदद से टीबी की खतरनाक बीमारी को किस तरह खत्म किया जा सकता है।

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