ग्लोबल वॉर्मिंग के साथ बढ़ रही हैं मानसिक बीमारियां, रिसर्च से हुआ खुलासा

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मैसाचुसेट्स। अमेरिका की मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) और हारवर्ड यूनिवर्सिटी ने रिसर्च में पाया है कि ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ने के साथ ही मानसिक बीमारियां भी लगातार बढ़ रही हैं।

बता दें कि साल 2017 तीसरा सबसे गर्म साल था। जबकि, 2016 में उससे ज्यादा गर्मी पड़ी थी। रिसर्च से पता चला है कि वातावरण में गर्मी बढ़ने से अमेरिका में मानसिक रोगियों की तादाद में भी सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। एमआईटी और हारवर्ड की रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि बढ़ती गर्मी और मानसिक बीमारियों का आपस में रिश्ता है। रिसर्च के नतीजे ये भी कहते हैं कि हर डिग्री तापमान बढ़ने के साथ ही मानसिक बीमारियों में दो फीसदी का इजाफा हो जाता है।

रिसर्च ने खुलासा किया कि गर्मी बढ़ने के साथ ही दिमाग बेचैन होने लगता है। सिर में दर्द भी इस दौरान होता है। गर्मी की वजह से डिप्रेशन होने की बात स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में पहले ही सामने आ चुकी है। इसके अलावा ये भी देखा गया है कि गर्मी के मौसम में अमेरिका और मेक्सिको में आत्महत्या की सबसे ज्यादा घटनाएं होती हैं।

एमआईटी और हारवर्ड ने अपनी रिसर्च में 10 साल से ज्यादा इकट्ठा किए डेटा को देखा। उन्होंने पाया कि जिन साल गर्मी ज्यादा पड़ी, उस साल मानसिक रोगियों की तादाद में काफी बढ़ोतरी हुई। अगस्त 2005 में कैटरीना हरीकेन के बाद भी मानसिक रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। ये ऐसे लोग थे, जिन्होंने अपना घर और रिश्तेदार खोए थे। रिसर्च में पाया गया कि जब भी औसत तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर गया, मानसिक बीमारों की संख्या में एक फीसदी का इजाफा हुआ। वहीं, किसी महीने 25 दिन बारिश होने से भी दो फीसदी मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ी।

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