सादा नहीं, इस तरह का फ्लेवर्ड मिल्क पसंद करते हैं भारतीय

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नई दिल्ली। बच्चों को दूध पिलाने में घरवालों को नानी याद आ जाती है। बच्चे मुंह बिचकाते हैं और उन्हें पोषण देने के लिए आम तौर पर कोई फ्लेवर मिलाकर दूध पिलाना पड़ता है। एक स्टडी में भी ये बात सामने आई है कि सादा दूध पीने के मुकाबले लोग फ्लेवर्ड दूध पीना पसंद करते हैं।

मिंटेल जीएनपीडी नाम की बहुराष्ट्रीय कंपनी की स्टडी में पता चला है कि लोगों को भारत में लोगों को सबसे ज्यादा चॉकलेट फ्लेवर वाला दूध पीना पसंद है। हालात ये है कि सितंबर 2017 से अगस्त 2018 यानी एक साल में भारत में जितने भी फ्लेवर्ड मिल्क के ब्रांड लॉन्च हुए हैं, उनमें 15 फीसदी चॉकलेट फ्लेवर्ड हैं। बाजार में चॉकलेट फ्लेवर्ड दूध का शेयर बादाम और स्ट्रॉबेरी फ्लेवर के मुकाबले 50 फीसदी ज्यादा है। बादाम और स्ट्रॉबेरी फ्लेवर के दूध का 8 फीसदी बाजार पर कब्जा है। जबकि, आम और वनीला फ्लेवर दूध ने 6 फीसदी बाजार पर कब्जा किया हुआ है।

मदर डेयरी की बात करें, तो कुल बिक्री का एक-तिहाई चॉकलेट फ्लेवर वाला दूध है। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के मुताबिक साल 2020 तक फ्लेवर्ड दूध का बाजार 25.5 फीसदी की दर से बढ़ सकता है। 2017 में 17 लाख करोड़ लीटर फ्लेवर्ड दूध बाजार में बिका था। बता दें कि साल 2013 से 2017 तक फ्लेवर्ड दूध का बाजार 22 फीसदी बढ़ चुका है।

बात करें लस्सी और छाछ की, तो इनकी बिक्री हर साल 15 फीसदी की दर से बढ़ रही है। चॉकेलट फ्लेवर वाले दूध की बिक्री भी बीते पांच साल में 11 फीसदी से काफी ज्यादा हो चुकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में फ्लेवर्ड दूध की कई किस्में आ रही हैं, लेकिन बच्चों और बड़ों में सबसे ज्यादा पसंद चॉकलेट फ्लेवर ही किया जाता है। पहले बादाम और स्ट्रॉबेरी फ्लेवर दूध काफी पसंद किया जाता था, लेकिन बीते पांच साल में इसकी खपत 19 फीसदी से 8 फीसदी पर आ गई है। बटरस्कॉच फ्लेवर दूध भी आठ फीसदी से गिरकर 2 फीसदी पर पहुंच गया है। वहीं, केसर, इलाइची और गुलाब के फ्लेवर वाले दूध की बिक्री भी लगातार बढ़ रही है।

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