अध्ययन में खुलासा : भारत में और अधिक घातक रूप में सामने आया मलेरिया

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नई दिल्‍ली। भारत में मलेरिया के मामलों में एक महत्‍वपूर्ण बदलाव देखने में आया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि पहले की अपेक्षा अब मलेरिया के अधिक घातक संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन में इस बात की पुष्टि हुई है। बता दें कि भारत में वर्ष 2030 तक मलेरिया उन्मूलन की बात हो रही है, लेकिन मलेरिया के नए तरह के मामले सामने आने के कारण इस लक्ष्य को पूरा करना कठिन हो सकता है।

किसने किया अध्‍ययन ?

मध्‍य प्रदेश के जबलपुर स्थित राष्ट्रीय जनजातीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों और उनके सहयोगियों द्वारा देश भर में मलेरिया संक्रमण के प्रभाव और इससे जुड़े मामलों में परिवर्तन को समझने के लिए किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि देश के दक्षिण-पश्चिमी तटीय इलाकों में ऐसे मामले अधिक देखने को मिले हैं, जिनमें मलेरिया का घातक संक्रमण पाया गया। इस अध्ययन के नतीजे हाल ही में शोध पत्रिका ‘प्लॉस वन’ में प्रकाशित किए गए हैं।

कैसे किया अध्‍ययन ?

शोधकर्ताओं ने शोध के दौरान 11 अलग-अलग स्थानों से मलेरिया के लक्षणों से ग्रस्त 2,300 मरीजों के रक्त के नमूने एकत्र किए। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में नियमित रूप से उपलब्ध मानक विधि और परजीवी की आनुवंशिक सामग्री की पहचान करने में सक्षम अधिक संवेदनशील पीसीआर विश्लेषण के जरिये इन नमूनों का परीक्षण किया गया। इसके अलावा शोधकर्ताओं ने पीसीआर निदान परीक्षण पर आधारित विभिन्न मलेरिया परजीवी के संक्रमणों का विश्लेषण करने के लिए पिछले 13 सालों के प्रकाशनों से आंकड़े भी एकत्र किए।

शोध में क्‍या आया सामने ?

प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर अपरूप दास का कहना है, ‘इंसानों में मलेरिया संक्रमण के लिए प्रमुख रूप से चार विभिन्न परजीवी प्रजातियों प्लास्मोडियम विवैक्स, प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम, प्लास्मोडियम मलेरिये और प्लास्मोडियम ओवेल को जिम्मेदार माना जाता है। इन मलेरिया परजीवियों की वाहक मादा एनेफ्लीज मच्छर है।’ उन्‍होंने बताया, ‘मलेरिया के कम आक्रामक रूप के लिए आमतौर पर प्लास्मोडियम विवैक्स परजीवी को जिम्मेदार माना जाता है, लेकिन अब पता चला है कि मलेरिया के घातक रूप के लिए जिम्मेदार प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम के संक्रमण के मामले भी काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। कई मामलों में तो मरीजों के एक से अधिक मलेरिया परजीवी से संक्रमित होने की घटनाएं भी सामने आई हैं।’

क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ ?

प्रोफेसर अपरूप ने बताया कि अध्‍ययन के दौरान मिले मलेरिया संक्रमित नमूनों में से 13 प्रतिशत नमूने प्लास्मोडियम विवैक्स और प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम के मिश्रित संक्रमण से ग्रस्त पाए गए हैं। देश के दक्षिण-पश्चिमी तटीय इलाकों में ऐसे मामले अधिक देखे गए। शोधकर्ताओं का मानना है कि मलेरिया के मिश्रित संक्रमण के मामले अधिक आक्रामक हो सकते हैं, जो एक बड़ी चुनौती के होगी। मलेरिया के मिश्रित संक्रमण के लिए कोई स्पष्ट उपचार न होने के कारण भी यह समस्या गंभीर हो सकती है।

बढ़ रहा प्लास्मोडियम मलेरिये का संक्रमण

प्रोफेसर दास ने मलेरिया परजीवी प्लास्मोडियम मलेरिये के उभार को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि “कुछ समय पहले तक मलेरिया परजीवी की यह प्रजाति ओडिशा के कुछ हिस्सों तक ही सीमित थी, लेकिन अध्ययन से पता चला है कि अब यह प्रजाति देश भर में फैल रही है। यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि प्लास्मोडियम मलेरिये के संक्रमण के निदान और उपचार के लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं।’ उधर, नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अभिनव सिन्हा कहते हैं, ‘इस शोध में मिश्रित मलेरिया के काफी मामले सामने आए हैं। इसके मद्देनजर मलेरिया उन्मूलन और इसके उपचार से जुड़े दिशा-निर्देशों का मूल्यांकन करना जरूरी हो गया है। अध्ययन से मिली जानकारियों के आधार पर ऐसा किया जा सकता है और समय रहते मलेरिया के परजीवी के विकास को रोका या टाला जा सकता है।’

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