रांची के रंजीत ने बनाया भारत का पहला इंसानी रोबोट, जो बोलता है फर्राटेदार हिंदी

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  • हिंदी के अलावा भोजपुरी, मराठी और अंग्रेजी भी बोल सकती है इंसानी रोबोट ‘रश्मि’

रांची। तकनीक के मामले में अब भारत भी दुनिया के दूसरे देशों को टक्कर देने की राह पर है। भारत एक इंसानी रोबोट तैयार कर रहा है, जिसे ‘रश्मि’ नाम दिया गया है। इस रोबोट को मूर्त रूप देने में जुटे हैं झारखंड की राजधानी रांची के रंजीत श्रीवास्तव। उनका कहना है कि ‘रश्मि’ को बनाने का 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और अब सिर्फ हाथ व पैर की इंस्टॉलेशन बाकी है। बता दें कि ‘सोफिया’ की तरह ही ‘रश्मि’ भी एक ह्यूमनॉयड रोबोट है।

‘रश्मि’ पर आया 50 हजार का खर्च

रंजीत श्रीवास्तव ने बताया कि ‘रश्मि’ को बनाने में उन्हें दो साल का वक्त लगा। इसे बनाने में अबतक करीब 50 हजार रुपये का खर्च आया है। हालांकि, इसे पूरी तरह तैयार होने में एक अभी कुछ और वक्‍त लगेगा। ‘रश्मि’ अभी अपनी आंखों, होठों और पलकों को हिला लेती है। साथ ही गर्दन घुमाकर इशारे भी कर सकती है।’ उन्होंने बताया कि ‘रश्मि’ एक-दो मुलाकातों के बाद किसी को भी आसानी से पहचान लेती है। इसकी आंखों में लगा कैमरा लोगों की छवि को कैद कर लेता है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  (AI) प्रोग्राम उस व्यक्ति की पहचान जाहिर करने में मदद करता है। रंजीत बताते हैं कि जब यह पूरी तरह से बन जाएगी तो पेपर पर सामने बैठे इंसान की पेंटिंग बना सकती है।

कौन हैं रंजीत ?

रांची के पहाड़ी मंदिर इलाके के रहने वाले 38 वर्षीय रंजीत ने मदुरै कामराज विश्‍वविद्यालय से एमबीए किया है। उनके पिता टीपी श्रीवास्तव बीएसएनएल में एजीएम हैं। रंजीत पहले एक आईटी कंपनी चलाते थे, फिर बचपन से रोबोट बनाने की इनकी चाहत ने इन्हें रोबोट बनाने के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2012 से लेकर 2014 तक रंजीत ने कागज में और दिमाग में रोबोट का डिजाइन तैयार किया, फिर 2016 से रोबोट बनाना शुरू किया। वर्ष 2017 में उन्‍होंने ‘रश्मि’ नामक रोबोट बनाया। 2018 में रंजीत ने रश्मि 2.2 का अपडेटेड वर्जन बनाया। करीब 15 वर्षों से सॉफ्टवेयर डेवलप कर रहे रंजीत ने रोबोट की उपयोगिता बताते हुए कहा कि भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में यह भविष्य की पीढ़ी की जरूरत है। यह रिसेप्शनिस्ट, सहायक, एकाकी लोगों और जरूरतमंदों के संवेदनशील मित्र के रूप में काम कर सकती है।

क्‍या है इस रोबोट की खासियत ? 

रंजीत बताते हैं कि ‘रश्मि’ दुनिया की पहली ऐसी रोबोट होगी, जो फर्राटेदार हिंदी बोल सकती है। यही नहीं, यह रोबोट हिंदी, मराठी और भोजपुरी के साथ-साथ अंग्रेजी भी बोल सकती है। आइए जानते हैं और क्‍या है इसकी खासियत –

  • ‘रश्मि’ दुनिया की पहली हिंदी भाषी, सच्चा अहसास देने वाली और महिला की तरह व्यवहार करने वाली रोबोट है, जो बातचीत के क्रम में होंठ भी हिलाती है।
  • इस रोबोट में लिंग्यूस्टिक इंटरप्रेटर (LI), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), विजुअल डेटा और फेशियल रिकॉगनिशन तकनीक का उपयोग किया गया है।
  • ‘रश्मि’ चेहरे, आंख, होंठ और भौं के जरिये अपनी अभिव्यक्ति करती है। जरूरत के अनुसार, वह अपनी गर्दन को घुमा-फिरा भी सकती है।
  • ‘रश्मि’ में इमोशन है, गुस्सा है, ईगो है। ‘रश्मि’ बिलकुल आम लोगों की तरह बात करती है। इसके फेवरेट एक्टर शाहरुख खान हैं।
  • ‘रश्मि’ भी ‘सोफिया’ की तरह न सिर्फ अपनी भावनाएं व्यक्त कर पाएगी, बल्कि लोगों के चेहरे को भी पहचान सकेगी।
  • ‘रश्मि’ घंटों किसी से बात कर सकती है, अकेलापन दूर कर सकती है, बैंक या किसी ऑफिस में रिसेप्‍शनिस्‍ट का काम कर सकती है।
  • ‘रश्मि’ से कोई भी सवाल पूछा जाए तो वह उसका जवाब सेंस ऑफ ह्यूमर के साथ देगी। जैसे अगर रश्मि से कहा जाए, ‘तुम बुरी दिखती हो’ तो जवाब में वह कहेगी ‘भाड़ में जाओ’। वहीं अगर उसकी तारीफ में कहा जाए, ‘तुम खुबसूरत हो’ तो जवाब में वह ‘शुक्रिया’ कहेगी।

कौन है सोफिया ?

बता दें कि ‘सोफिया’ दुनिया की पहली इंसानी रोबोट है, जिसे 2015 में हांगकांग की हैनसन रोबोटिक्स ने बनाया था। ‘सोफिया’ को बनाने वाले डेविड हैनसन हैं। हैनसन बताते हैं कि दरअसल, ‘सोफिया’ ह्यूमनॉएड रोबोटिक्स हार्डवेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर, आर्टिफिशियल स्किन मैटेरियल और आवाज पहचानने वाले सॉफ्टवेयर का कॉम्बिनेशन है। ‘सोफिया’ अपने चेहरे की 48 मसल्स को मूव कर सकती है। वह न सिर्फ चेहरे पर आने वाले एक्सप्रेशंस अच्छी तरह पहचान सकती है, बल्कि यह किसी के भी साथ बातचीत कर सकती है। इस साल की शुरुआत में सोफिया भारत भी आई थी। आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए सऊदी अरब ने वर्ष 2017 में ‘सोफिया’ को नागरिकता दी है।

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