आप जानते हैं, वज़न घटने के बाद आख़िर कहां गायब हो जाती है शरीर की चर्बी ?

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नई दिल्‍ली। स्कूल के दिनों में फिजिक्‍स और केमिस्‍ट्री पढ़ाते समय टीचर्स छात्रों को बताते हैं कि ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती है, हां उसका स्वरूप बदल जाता है। इसे पदार्थ के संरक्षण का नियम कहते हैं। अक्‍सर हम लोगों द्वारा वज़न घटाने की बात सुनते हैं और थोड़े प्रयास के बाद उनका वजन कम भी हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि जब हम वज़न घटाते हैं तो उस चर्बी का क्या होता है ? वो कहां चली जाती है ? यह एक ऐसा सवाल है, जिसका सही जवाब शायद कुछ ही लोगों को पता होगा।

क्‍या कहते हैं लोग ?

स्वास्थ्य के क्षेत्र से संबंध रखने वाले क़रीब 150 से ज़्यादा लोगों से यह सवाल पूछा गया कि वजन घटने के बाद चर्बी आख़िर कहां चली जाती है ? इनमें से ज़्यादातर लोगों का जवाब था कि जो चर्बी हम घटाते हैं, वह ऊर्जा में बदल जाती है। लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसा होना संभव नहीं, क्योंकि इससे पदार्थ के संरक्षण के नियम का उल्लंघन होता है। कुछ लोगों ने कहा कि चर्बी, मांसपेशियों में बदल जाती है। वहीं कुछ का कहना था कि जो चर्बी हम घटाते हैं वो मल के रूप में हमारे शरीर से बाहर निकल जाती है।

असल में क्‍या होता है ?

इस सवाल का जवाब दिया है कि ऑस्ट्रेलिया में सिडनी के यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथ वेल्स के प्रोफ़ेसर एजे ब्राउन और शोधकर्ता रूबेन मीरमान ने। उनके जवाब ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। आइए जानते हैं कि उनका इस बारे में क्‍या कहना है –

  • प्रोफेसर ब्राउन और रूबेन कहते हैं कि दरअसल जब हम वजन घटाते हैं तो चर्बी कम होती है, वह कार्बन डाईऑक्साइड और पानी में तब्दील हो जाती है। कार्बन डाईऑक्साइड को हम सांस छोड़ते समय शरीर से बाहर निकाल देते हैं, जबकि पानी विभिन्न शारीरिक क्रियाओं से होता हुआ अंत में पेशाब के रूप में बाहर निकल जाता है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि हम भोजन के रूप में जो भी कार्बोहाइड्रेट और वसा लेते हैं, वह कार्बन डाईऑक्‍साइड और पानी में टूट जाता है और साथ ही अल्कोहल के रूप में भी। कार्बन डाईऑक्साइड को हमारे फेफड़ों द्वारा बाहर फेंक दिया जाता है।
  • यही प्रक्रिया प्रोटीन के साथ भी होती है। हालांकि कुछ चीज़ें यूरिया और दूसरे ठोस के रूप में भी बंट जाती हैं और बाद में मल के रूप में, पसीने के रूप में या यूरीन के रूप में शरीर से बाहर निकल जाती हैं।
  • उनका कहना है कि सिर्फ़ फ़ाइबर्स ही ऐसे होते हैं, जो हमारे पेट तक पहुंचते हैं। पाचन क्रिया के बाद यह हुआ अवशेष मल के रूप में बाहर आता है।

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