नया प्यूरीफायर, जो प्रदूषित हवा से 80 फीसदी कम कर देगा PM 2.5 की मात्रा

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  • CSIR के वैज्ञानिकों ने बनाया हवा को साफ करने वाला प्‍यूरीफायर, कहीं भी लगा सकेंगे
  • ज्‍यादा ट्रैफिक वाले क्षेत्रों, चौराहों और पार्किंग स्‍थलों के लिए साबित होगा अधिक उपयोगी

नई दिल्‍ली। भारतीय शोधकर्ताओं ने अधिक ट्रैफिक या भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के कारण दूषित हवा को शुद्ध करने के लिए एक नए प्यूरीफायर का विकास किया है। इसे डेवलप करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्यूरीफायर को चौराहों और पार्किंग स्थलों जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लगाकर प्रदूषित हवा को साफ किया जा सकता है। फिलहाल प्रयोग के तौर पर ऐसे दो उपकरण दिल्ली में दो स्थानों पर लगाए गए हैं।

CSIR के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई डिवाइस

किसने बनाई यह डिवाइस ?

‘वायु’ नाम के इस प्यूरीफायर को वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की नागपुर स्थित प्रयोगशाला राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI) ने विकसित किया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने पिछले दिनों दिल्‍ली में इस प्रोटोटाइप का अनावरण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अगले एक महीने में शहर के 54 अन्य स्‍थानों पर ये उपकरण लगाए जाएंगे। बता दें कि एक प्यूरीफायर की लागत करीब 60 हजार रुपये है।

कैसे काम करता है यह उपकरण ?

दरअसल, यह उपकरण दो चरणों में कार्य करता है। पहले चरण में डिवाइस में लगा पंखा अपने आसपास की हवा को सोख लेता है और इसमें लगे तीन फिल्टर धूल और सूक्ष्म कणों जैसे प्रदूषकों को अलग कर देते हैं। इसके बाद हवा को विशेष रूप से डिजाइन किए गए कक्ष में भेजा जाता है जहां टाइटेनियम कोटेड सक्रिय कार्बन के जरिए हवा में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन्स तत्वों को कम हानिकारक कार्बन डाईऑक्साड में ऑक्सीकृत कर दिया जाता है। दो अल्‍ट्रावायलेट लैंपों के जरिए ऑक्सीकरण की प्रक्रिया होती है। आखिर में डिवाइस द्वारा तेज दबाव के साथ शुद्ध हवा को वायुमंडल में दोबारा प्रवाहित कर दिया जाता है ताकि बाहरी हवा में प्रदूषकों को कम किया जा सके।

प्रदूषण में कितनी आएगी कमी ?

नीरी के निदेशक डॉ. राकेश कुमार बताते हैं, ‘इस उपकरणर में लगे फिल्टर बगैर बुने कपड़े से बने हैं जो सूक्ष्म कणों को 80-90 प्रतिशत और जहरीली गैसों को 40-50 प्रतिशत तक हटाने की क्षमता रखते हैं। यह उपकरण 5.5 फीट लंबा और एक फुट चौड़ा है जो PM-10 की मात्रा को 600 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक कम कर सकता है। इसी तरह आधे घंटे में इस उपकरण की मदद से PM -2.5 की मात्रा को 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक कम किया जा सकता है। खास बात यह है कि इस उपकरण को 10 घंटे तक चलाने में सिर्फ आधा यूनिट बिजली खर्च होती है। यह उपकरण अपने आसपास के लगभग 500 वर्ग मीटर क्षेत्र में शुद्ध हवा उपलब्ध कराने में सक्षम है।’

और बेहतर बनाएंगे उपकरण को

डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि हमारी कोशिश है कि अगले तीन महीनों में इस उपकरण को और बेहतर बनाया जाए, ताकि 10 हजार वर्ग मीटर के दायरे में हवा को शुद्ध किया जा सके। इसके अलावा, वायुमंडल को प्रदूषित करने वाले नाइट्रस और सल्फर ऑक्साइड समेत अन्य कारकों को भी इस उपकरण में शामिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि इस प्यूरीफायर उपकरण का डिजाइन अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान द्वारा तैयार किया जाएगा। हालांकि, इस उपकरण का मौजूदा प्रोटोटाइप आईआईटी, मुंबई के औद्योगिक डिजाइन सेंटर की मदद से डिजाइन किया गया है।

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