अब नहीं खराब होंगी सब्जियां, वैज्ञानिकों ने बनाया चलता-फिरता सोलर कोल्ड स्टोरेज

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नई दिल्‍ली। भंडारण की उचित व्‍यवस्‍था न होने से बड़ी मात्रा में फल और सब्जियां समय से पहले खराब हो जाते हैं। इस समस्‍या को ध्‍यान में रखते हुए अब वैज्ञानिकों ने सौर ऊर्जा से चलने वाली एक ऐसी मोबाइल कोल्ड स्टोरेज यूनिट बनाई है, जो फल तथा सब्जियों को नष्ट होने से बचाने में मददगार साबित हो सकती है।

किसने बनाया यह कोल्‍ड स्‍टोरेज ?

नई दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के कृषि इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने यह मोबाइल कोल्ड स्टोरेज तैयार किया है। इस कोल्ड-स्टोरेज को विकसित करने वाले वैज्ञानिक डॉ. पी.के. शर्मा कहते हैं, दुनिया में फल और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक भारत है, लेकिन कोल्‍ड स्‍टोरेज की सुविधाएं नहीं होने से 30 से 35 प्रतिशत फल और सब्जियां लोगों तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाती हैं। अब किसान सौर ऊर्जा वाले इस नए कोल्ड स्टोरेज का इस्‍तेमाल कर अपने उत्‍पादों को खराब होने से बचा सकेंगे।

कैसे काम करता है यह ?

डॉ. शर्मा ने बताया कि इस कोल्ड-स्टोरेज में सौर ऊर्जा से चलने वाला 0.8 टन का एक एयरकंडीशनर लगाया गया है, जिससे इसके भीतर का तापमान 9.5 से 11 डिग्री सेल्सियस और आर्द्रता 73 से 92 प्रतिशत तक बनी रहती है। यह एयरकंडीशनर एक सौर फोटोवोल्टिक सिस्टम द्वारा संचालित होता है। इस सिस्टम को कुल 8 सौर पैनलों, एक सौर इन्वर्टर और चार बैटरियों वाले एक बैटरी-बैंक को मिलाकर बनाया गया है। इसे इस तरह तैयार किया गया है, जिससे दिन में अधिक से अधिक सौर ऊर्जा का उपयोग किया जा सके। इसमें लगे पहियों द्वारा इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से ले जाया जा सकता है। इस कोल्ड स्टोरेज पर किए गए अनुसंधान के नतीजे शोध पत्रिका ‘करंट साइंस’ में प्रकाशित किए गए हैं।

कितनी है भंडारण क्षमता ?

न्यूनतम लागत पर फलों और सब्जियों के लंबे समय तक भंडारण के लिए बनाए गए इस कोल्ड स्टोरेज की भंडारण क्षमता 4.85 घनमीटर है। इसमें 1000 किलोग्राम फल तथा सब्जियों का भंडारण आसानी से किया जा सकता है। कोल्‍ड स्‍टोरेज की लंबाई 1.83 मीटर, चौड़ाई 1.34 मीटर और ऊंचाई 1.98 मीटर है। इसे गैल्वनीकृत लोहे, पॉली-कार्बोनेट और प्लाईवुड की चादरों और ग्लास-वूल से बनाया गया है। इस कोल्ड-स्टोरेज में 40 क्रेट्स हैं और प्रत्येक क्रेट में 25 किलोग्राम फल और सब्जियां रखी जा सकती हैं।

20 दिन तक ताजा रहेंगी सब्जियां

डॉ. शर्मा बताते हैं कि कोल्ड स्टोरेज में निम्न तापमान और उच्च सापेक्ष आर्द्रता के कारण टमाटर जैसे उत्पाद 20 दिन तक ताजा बने रह सकते हैं। अन्य सब्जियों और फलों, जैसे पालक, शिमला मिर्च, ककड़ी, लौकी, तोरई और पपीते को भी 20 दिनों तक सुरक्षित रख सकते हैं। इससे फलों व सब्जियों की गुणवत्ता और ताजगी बनाए रखने में मदद मिलेगी। यही नहीं, इसके इस्‍तेमाल से किसानों और छोटे सब्जी तथा फल-विक्रेताओं की आय भी बढ़ेगी।

बिजली की होगी बचत

वैज्ञानिक डॉ. शर्मा उत्‍साह पूर्वक बताते हैं, ‘सौर ऊर्जा से चलने वाले इस नए कोल्ड स्टोरेज से बिजली की समस्या से जूझ रहे किसानों को सबसे अधिक राहत मिलेगी। साथ ही इससे कृषि उत्पादों के खराब हो जाने की समस्या दूर होगी।’ हालांकि डॉ. शर्मा यह भी कहते हैं कि भारत में सौर ऊर्जा से संचालित कोल्ड स्टोरेज का निर्माण अभी प्रयोगात्मक चरण में है। फिलहाल ज्‍यादातर कोल्‍ड स्‍टोरेज बिजली से ही संचालित हैं। इनका उपयोग एक निश्चित तापमान पर सीमित उत्पादों जैसे – आलू, संतरा, सेब, अंगूर, अनार, फूलों इत्यादि के भंडारण के लिए ही हो पाता है।

कितनी है लागत ?

शोधकर्ताओं के अनुसार, उनके द्वारा बनाए गए इस कोल्ड स्टोरेज की लागत लगभग 1.72  लाख रुपये तक हो सकती है। इसमें 1000 किलोग्राम फलों तथा सब्जियों को भंडारित करने की लागत 6.07 रुपये प्रतिदिन आती है। उनका कहना है कि सिर्फ बिजली के खर्च की बचत से ही 9 सालों में इस कोल्ड स्टोरेज की लागत निकल आती है। अध्ययनकर्ताओं में डॉ. पीके शर्मा के अलावा डॉ. एचएस अरुण कुमार भी शामिल थे।

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