बच्चे के लिए चाहते हैं अच्छे मार्क्स, तो स्कूल की देखिए परफॉरमेंस

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इस्लामाबाद। हर माता-पिता चाहता है कि उसका बच्चा स्कूल में अच्छा परफॉरमेंस करे। इसके लिए वे अपने बच्चों को नामचीन स्कूल भेजते हैं, लेकिन तमाम बार दिखता है कि नामी स्कूल में जाकर भी बच्चा अच्छे नंबर नहीं ला पाता। पाकिस्तान में हुई एक स्टडी में इसकी वजह निकालने की कोशिश की गई। इस स्टडी का लब्बोलुआब ये है कि बच्चे को अगर अच्छे मार्क्स दिलाने हैं, तो उसके स्कूल की भी मार्किंग होनी जरूरी है।

ये कहती है स्टडी
स्टडी कहती है कि अगर बच्चों के माता-पिता को स्कूल के परफॉरमेंस की जानकारी दी जाए, तो इससे बच्चों का टेस्ट स्कोर और स्कूल में उनकी तादाद बढ़ती है। इसके अलावा निजी स्कूल अपनी मार्किंग होने से फीस भी घटाते हैं।

ग्रामीण इलाकों में हुई स्टडी
पाकिस्तान के 112 गांवों में ये स्टडी की गई। इन गांवों के लोग अशिक्षित थे। यहां आस-पास ज्यादा स्कूल नहीं थे, लेकिन जो थे उनकी फीस बहुत ज्यादा थी। हर गांव में औसतन 7.3 स्कूल थे। 112 में से आधे गांव में लोगों को आसपास के सारे प्राइवेट और सरकारी स्कूलों की परफॉरमेंस के बारे में बताया गया। खास कर मीटिंग भी की गई जिसमें अशिक्षित लोगों को स्कूलों की मार्किंग और उसके तौर-तरीके समझाए गए।बाकी आधे गांव को वैसे ही छोड़ दिया गया।

इस तरह हुई स्टडी
स्टडी के तहत साल 2004 में छात्रों का प्रारंभिक परीक्षण किया गया और बेसलाइन सर्वे को जमा किया गया। साल 2005 में भी इसे प्रोसेस को दोहराया गया। जानिए इसका रिजल्ट क्या आया।

1. सीखने में सुधार- जिन गांवों में इस तरह का प्रयोग किया गया, वहां स्कूलों में बच्चों के टेस्ट स्कोर में 0.11 स्टैंडर्ड डेविएशन का सुधार आया। फीस नियंत्रित किए गए गांवों में टेस्ट स्कोर में 42% की वृद्धि हुई। सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के सीखने के तरीके में सुधार देखा गया। उनका स्कोर 0.09 स्टैंडर्ड डेविएशन बढ़ा।

2. प्राइवेट स्कूलों ने कम की फीस- जिन गांवों में इस तरह का प्रयोग किया गया, वहां के प्राइवेट स्कूलों की फीस नियंत्रण में रखे गए गांवों की तुलना में 17 प्रतिशत कम हुई। इससे पैरेंट्स आसानी से स्कूलों को कंप्येर कर पाए।

3.नामांकन बढ़े- इंटरवेंशन से पहले के मुकाबले 5 से 15 उम्र के 76 प्रतिशत लड़के, और 65% लड़कियों का नामांकन बढ़ा। यानी वे स्कूल जाने लगे।

इससे नतीजा ये सामने आया कि जिन स्कूलों का परफॉरमेंस खराब था, वो बिजनेस से बाहर हो गए। जिन स्कूलों का परफॉरमेंस ठीक था उनका परफॉरमेंस बरकरार रहा। इस सर्वे से एक और सामने आई। पता चला कि पैरेंट्स ने बच्चों पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया। इसले अलावा बच्चों के माता-पिता स्कूलों की एक्टिविटी पर भी ध्यान देने लगे। इसके बाद स्कूलों में भी सर्वे किया गया, जहां पाया गया कि निजी स्कूलों में शिक्षकों की योग्यता में वृद्धि हुई।

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