कैंसर की नई थेरेपी खोजने पर अमेरिका व जापान के वैज्ञानिकों को चिकित्सा का नोबेल

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स्टॉकहोम। प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कारों की लिस्ट में इस साल पहली घोषणा चिकित्सा के क्षेत्र के लिए हुई। चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान के लिए अमेरिका के प्रोफेसर जेम्स एलिसन और जापान के प्रोफेसर तासुकु होंजो को संयुक्‍त रूप से वर्ष 2018 के नोबेल पुरस्‍कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई। उन्हें कैंसर के इलाज में नई थेरेपी ढूंढने के लिए यह सम्मान दिया जाएगा।

कौन हैं दोनों वैज्ञानिक ?

प्रोफेसर एलिसन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास और होंजो जापान की क्योटो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हैं। बता दें कि जेम्स एलिसन और तासुकु होंजो को इससे पहले वर्ष 2014 में अपनी रिसर्च के लिए एशिया का नोबेल कहे जाने वाले ‘टैंग प्राइज’ से सम्‍मानित हो चुके हैं। दोनों वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार के रूप में लगभग 10.1 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 7 करोड़ 35 लाख रुपए) मिलेंगे। एलिसन और होंजो को 10 दिसम्बर को स्टॉकहोम में एक औपचारिक समारोह में ये पुरस्कार दिए जाएंगे।

क्‍या है नई थेरेपी ?

कैंसर जैसी दुर्लभ बीमारी के इलाज के लिए प्रोफेसर एलिसन और होंजो ने ऐसी थेरेपी विकसित की है जिससे शरीर की कोशिकाओं में इम्यून सिस्टम को कैंसर ट्यूमर से लड़ने के लिए मजबूत बनाया जा सकेगा। नई थेरेपी के जरिए शरीर का प्रतिरोधक तंत्र कैंसर प्रभावित कोशिकाओं में बनने वाले प्रोटीन को शरीर में बढ़ने से रोकेगा। यह प्रोटीन आमतौर पर प्रतिरोधक तंत्र की कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने की क्षमता को कम कर देता है। इस थेरेपी के बाद प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर कैंसर से लड़ने में सक्षम होगी।

इस बार साहित्‍य का नोबेल नहीं

वर्ष 1949 के बाद पिछले 70 साल में पहली बार ऐसा होगा कि साहित्य का नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जाएगा। दरअसल #Metoo से जुड़े विवादों के कारण इस वर्ष साहित्य का नोबेल नहीं देने का फैसला किया गया है। विजेता का चुनाव करने वाली स्वीडिश एकेडमी की ज्यूरी मेंबर कटरीना फ्रोस्टेनसन के पति जॉन क्लॉड अरनॉल्ट पर यौन शोषण के आरोप लगे हैं, इसीलिए 2018 के विजेता के नाम पर मुहर नहीं लग पाई। अरनॉल्ट को सोमवार को ही स्वीडन की एक कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में दोषी पाया। उन्हें दो साल की जेल की सजा हुई है।

जीवित लोगों को ही मिलता है नोबेल

बता दें कि केवल जीवित लोगों को ही नोबेल पुरस्कार दिया जा सकता है। हालांकि तीन व्यक्ति ऐसे हैं जिन्हें मरणोपरांत पुरस्कार दिया गया। सबसे पहले वर्ष 1931 में एरिक एक्सल कार्लफेल्ट को साहित्य के लिए और फिर 30 साल बाद वर्ष 1961 में डाग हामरशोल्ड को शांति का नोबेल दिया गया। इन दोनों की मृत्‍यु नामांकन और पुरस्कार दिए जाने के बीच हुई। तीसरी बार 1974 में फिर ऐसा हुआ तो उसके बाद से नियम ही बदल दिया गया।

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