फेसबुक-ट्विटर का आश्वासन-ऐसी खबरें नहीं प्रसारित करेंगे, जिनसे प्रभावित हो चुनाव

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नई दिल्ली।  गूगल, फेसबुक और ट्विटर ने चुनाव आयोग को आश्‍वासन दिया है कि उनका प्लेटफॉर्म ऐसी किसी खबर को प्रसारित नहीं करेगा जिससे प्रचार अभियान के दौरान चुनाव की विश्वसनीयता पर कोई असर पड़े। मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने रविवार (30 सितंबर) को यह जानकारी देते हुए बताया कि कर्नाटक के चुनाव में इस बात को परखा जा चुका है।

सोशल मीडिया प्रमुखों से की थी बात

ओपी रावत ने बताया कि वरिष्ठ उपचुनाव आयुक्त उमेश सिन्हा ने गूगल, फेसबुक और ट्विटर के क्षेत्रीय प्रमुखों के साथ बातचीत की थी। सिन्हा ने प्रमुखों से अपील की थी कि क्या वे चुनावों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आयोग को आश्वस्त कर सकते हैं। सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल फेक न्यूज के लिए नहीं होने देना चाहिए ताकि जनता पर इनका उल्टा असर न पड़े। रावत ने बताया कि उन्हें इंटरनेट पर बादशाहत रखने वाली गूगल और ट्विटर व फेसबुक ने आश्वस्‍त किया है कि वे चुनाव प्रचार के दौरान अपने प्लेटफार्म से चुनाव को प्रभावित नहीं होने देंगे।

मतदान के पहले 48 घंटे अहम

मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान फेसबुक-ट्विटर समेत सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल होगा। इन सभी को गलत खबरें प्रसारित होने को रोकना चाहिए। यह उस समय ज्यादा जरूरी है, जब वोटिंग के लिए महज 48 घंटे बचे होंगे। रावत का कहना है कि मतदान के 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार बंद हो जाता है। इस वक्त को साइलेंस पीरियड कहा जाता है। इसी दौरान मतदाता यह फैसला लेता है कि उसे किसे वोट देना है।

इस बार बड़े पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत 

रावत ने बताया कि इन कंपनियों ने कर्नाटक चुनाव के दौरान ऐसी खबरों की रोकथाम के लिए परीक्षण किया था। यह छोटा पायलट प्रोजेक्ट की तरह था। इस बार लोकसभा चुनाव से पहले चार राज्यों (मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम) में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान अपेक्षाकृत बड़े पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत होगी। बता दें कि इन राज्यों में विधानसभा चुनाव इसी साल के अंत में होने हैं।

पार्टियों के खर्च का भी मिलेगा ब्‍योरा

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों ने यह आश्वासन भी दिया है कि वे राजनीतिक विज्ञापन भी दिखाएंगे। उसमें पार्टियों का खर्च भी शामिल रहेगा। गूगल का कहना है कि वह अपने यहां एक ऐसी प्रणाली स्थापित करेगा जिससे उनके मंचों या कंपनियों में किए गए अतिरिक्त खर्च का ब्योरा अपने आप चुनाव आयोग के पास चला जाएगा। इस प्रणाली के जरिए लाइक्स खरीदने या अचानक लाखों फालोवर्स बढ़ाने जैसे आरोपों को गहराई से समझा जा सकेगा।

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