शोधकर्ताओं ने बनाया ऐसा स्कूल बैग, जो कम करेगा बच्चों का बोझ

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नई दिल्ली। बच्चों के लिए स्कूल बैग का भारी वजन हमेशा से एक समस्या रही है। अक्‍सर हम देखते हैं कि छोटी क्‍लास के बच्‍चे भारी-भरकम स्‍कूल बैग टांगे हांफते हुए स्‍कूल और घर पहुंचते हैं। लेकिन बच्‍चों को जल्‍द ही इस परेशानी से निजात मिलने वाली है। भारतीय शोधकर्ताओं ने अब एक ऐसा स्कूल बैग तैयार किया है, जो बच्चों के कंधे और रीढ़ की हड्डी पर पड़ने वाले बोझ को कम करने में मददगार साबित होगा।

PEC के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किया गया स्कूल बैग

किसने तैयार की डिजाइन ?

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (PEC) चंडीगढ़ के शोधकर्ताओं ने एक अध्‍ययन के बाद इस नए तरह के बैग की डिजाइन तैयार की है। इस बैग को कुछ इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें भारी किताबों को रीढ़ के करीब और हल्की पुस्तकों को रीढ़ से दूर रखा जा सकता है। बैग में पट्टियों को इस तरह लगाया गया है जिससे बैग का निचला सिरा कमर से दो सेंटीमीटर ऊपर रहता है। यह अध्ययन शोध पत्रिका ‘करंट साइंस’ में प्रकाशित किया गया है।

कैसे किया गया अध्‍ययन ?

शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में 11 से 13 साल आयु वर्ग के स्कूली बच्चों में संशोधित बैग और मौजूदा बैग के बीच चाल संबंधी मापदंडों, शरीर की मुद्रा, धड़ के कोण और ऊर्जा व्यय अंतर की जांच की। 26 बच्‍चों में शरीर के 10 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 30 प्रतिशत की लोडिंग स्थितियों के तहत नए और मौजूदा बैग का परीक्षण किया गया। अध्‍ययन में सामने आया कि अपने शरीर के 30 प्रतिशत वजन के बराबर भारी मौजूदा बैग उठाने वाले बच्चों में सबसे ज्यादा ऊर्जा खर्च होती है, जबकि नया बैग उठाने पर शरीर के 30 प्रतिशत वजन के बराबर ही ऊर्जा लगी। शोधकर्ताओं के अनुसार, नए बैग के उपयोग से 6.7 कैलोरी प्रति मिनट ऊर्जा की खपत होती है, जबकि मौजूदा बैग के साथ 8.4 कैलोरी प्रति मिनट ऊर्जा खर्च होती है।

क्‍या कहते हैं शोधकर्ता ?

PEC के औद्योगिक और उत्पाद डिजाइन में उत्कृष्टता केंद्र के शोधकर्ता ईशांत गुप्ता ने बताते हैं, ‘हमने रीढ़ और कंधों से भार को कम करके इसे पेड़ू क्षेत्र में डिस्‍ट्रीब्‍यूट करने के लिए एक आंतरिक फ्रेम बैग में लगाया है। यह नया डिजाइन धड़ पर भी भार को समान रूप से वितरित करने में मददगार होगा। ईशांत का कहना है कि पहले के अध्ययनों में पाया गया है कि मनुष्यों में ऊर्जा खपत का संबंध धड़ के आगे की ओर झुकाव से पाया गया है। पारंपरिक स्कूल बैग बैकपैक लोड को शरीर के द्रव्यमान के केंद्र के करीब रखते हैं, जिसके कारण चाल के साथ-साथ ऊर्जा व्यय में परिवर्तन होता है। इस तरह के बैग उठाते समय शरीर आगे की ओर झुक जाता है, जहां शरीर के ऊपरी हिस्से, सिर, खोपड़ी और बैग के वजन को संतुलित करना होता है। नए डिजाइन में रीढ़ की हड्डी को ऊपरी शरीर के वजन को संतुलित करने की आवश्यकता नहीं होती है और कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ ?

नई दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में ऑर्थोपेडिक्स के प्रोफेसर डॉ. दविंदर सिंह के अनुसार, ‘शोधकर्ताओं ने बैकपैक वजन का अध्ययन करते समय कई मानकों पर विचार किया है। हालांकि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बच्‍चे को यह पता हो कि अपने बैग को सही ढंग से कैसे पैक किया जाना चाहिए। आमतौर पर बच्चों के बैग का वजन उनके शरीर के वजन के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। भारी बैग पॉस्चर संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है।’ उनका कहना है कि नए बैग की मदद से स्कूली बच्चों में पीठ दर्द और थकान के कारणों को कम किया जा सकता है।

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