SC ने बदली 800 साल पुरानी प्रथा, सबरीमाला मंदिर में अब जा सकेंगी सभी महिलाएं

36 0

नई दिल्ली।  सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में केरल के सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने और पूजा करने की इजाजत दे दी है। पहले यहां 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इसे चुनौती दी गई थी। केरल सरकार भी मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के पक्ष में थी। मंदिर का संचालन करने वाला त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड अब कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी में है।

क्‍या कहा सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने शुक्रवार (28 सितंबर) को अपने फैसले में कहा, ‘सभी अनुयायियों को पूजा करने का अधिकार है। लैंगिक आधार पर श्रद्धालुओं से भेदभाव नहीं किया जा सकता।’ उन्‍होंने कहा, ‘10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं को मंदिर में जाने से रोकने की प्रथा संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन है। सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की जो बंदिशें लगाई गई हैं, उन्हें अनिवार्य धार्मिक प्रथा करार नहीं दिया जा सकता।’ बता दें कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने सुनवाई के बाद इस मामले में 1 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

भगवान के प्रति उपासना में भेदभाव नहीं

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली 5 जजों की संविधान पीठ ने अपने फैसले में टिप्‍पणी की, ‘महिलाएं पुरुषों से कमतर नहीं हैं। एक तरफ आप महिलाओं को देवी की तरह पूजते हैं, दूसरी तरफ उन पर बंदिशें लगाते हैं। भगवान के प्रति आस्था शारीरिक या जैविक आधार पर परिभाषित नहीं की जा सकती।’ कोर्ट ने कहा, ‘सबरीमाला मंदिर की प्रथा हिंदू महिलाओं के अधिकारों का हनन करती है। कानून और समाज का काम यह है कि वे बराबरी बनाए रखें। भगवान के प्रति उपासना में भेदभाव नहीं बरता जा सकता।’

पिछली सुनवाई पर क्‍या कहा था कोर्ट ने

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई पर 25 जुलाई को संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लेख करते हुए कहा था, ‘किसी भी व्यक्ति को मान्यताओं के आधार पर मंदिर में प्रवेश करने से नहीं रोक सकते। बोर्ड अगर मान्यताओं की बात करता है तो साबित करे कि महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी धार्मिक प्रथाओं का अभिन्न अंग है। क्या सिर्फ माहवारी से ही महिलाएं मलिन हो जाती हैं ?’ कोर्ट का यह भी कहना था कि 10 से 50 साल की उम्र तय करने का तार्किक आधार क्या है? लड़की को नौ साल की उम्र में मासिक धर्म शुरू हो जाए या 50 की उम्र के बाद भी जारी रहे तो क्या होगा?

अय्यप्पा स्वामी को मानते हैं ब्रह्मचारी

बता दें कि केरल में शैव और वैष्णवों में बढ़ते वैमनस्य के कारण एक मध्य मार्ग की स्थापना की गई थी। इसी के तहत अय्यप्पा स्वामी का मंदिर सबरीमाला बनाया गया था। इसमें सभी पंथ के लोग आ सकते थे। ये मंदिर 700 से 800 साल पुराना माना जाता है। अयप्पन स्वामी को ब्रह्मचारी माना गया है, इसी वजह से मंदिर में उन महिलाओं का प्रवेश वर्जित था जो रजस्वला हो सकती थीं।

Related Post

खुले में पेशाब करते पकड़े गए महाराष्‍ट्र के मंत्री, वीडियो वायरल

Posted by - November 20, 2017 0
मुंबई: महाराष्ट्र के जल संरक्षण मंत्री राम शिंदे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. इस वीडियो में वह सड़क के…

मोदी के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में अड़ंगा, आदिवासियों ने जमीन देने से किया इनकार

Posted by - June 2, 2018 0
मुंबई। पीएम मोदी के बुलेट ट्रेन के ड्रीम प्रोजेक्‍ट को झटका लग सकता है। केन्द्र की मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी…

‘पद्मावत’ रिलीज न होने पर चार राज्यों और करणी सेना के खिलाफ अवमानना याचिका

Posted by - January 25, 2018 0
सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल, सोमवार को होगी याचिकाओं पर सुनवाई नई दिल्‍ली। फिल्म ‘पद्मावत’ को पूरे देश…

अमेरिकी सीनेटर बोले – उत्‍तर कोरिया से भी ज्यादा खतरनाक है पाकिस्‍तान

Posted by - October 26, 2017 0
कहा – पाक के परमाणु हथियारों पर केंद्रीकृत नियंत्रण नहीं, इन्‍हें कभी भी चुराया और बेचा जा सकता है वाशिंगटन।…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *