स्टडी से हुआ खुलासा, जो डर गया समझो मर गया वाला गब्बर का डायलॉग है सही

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पोर्ट्समाउथ। शोले फिल्म तो देखी ही होगी आपने। इसमें गब्बर सिंह का फेमस डायलॉग है- “जो डर गया, समझो मर गया”। आप सोच रहे होंगे कि आखिर शोले के गब्बर सिंह का डायलॉग हम आपको याद क्यों दिला रहे हैं। इस डायलॉग की याद हम इसलिए दिला रहे हैं, क्योंकि एक स्टडी से पता चला है कि वाकई जो डर जाता है और जूझने का माद्दा छोड़ देता है, उसकी मौत जल्दी हो जाती है।

कहां हुई स्टडी ?

ब्रिटेन की पोर्ट्समाउथ यूनिवर्सिटी के सीनियर रिसर्च फैलो डॉ. जॉन लीच की रिसर्च कहती है कि जूझने की ताकत जिनमें नहीं रहती, उनकी जल्दी मौत हो जाती है। इसे साइकोजेनिक मौत कहते हैं। लीच का कहना है कि जब लोग हालात से लड़ नहीं पाते और सोचते हैं कि उनके सामने और कोई रास्ता नहीं है, तो वो मौत को आखिरी रास्ते के तौर पर मान लेते हैं। रिसर्च के मुताबिक जब कोई अवसाद में हो और इससे बाहर न आ सके, तो तीन हफ्ते के भीतर वो मौत को गले लगा लेता है।
 
ट्रॉमा से होती है मौत

डॉ. लीच का कहना है कि साइकोजेनिक मौत सुसाइड नहीं होता है। लोगों की मौत मानसिक आघात लगने से होती है। इस तरह की मौत के पांच स्तर होते हैं। डॉ. लीच के मुताबिक ऐसा व्यक्ति पहले सामाजिक तौर पर खुद को काट लेता है। उसमें उदासीनता आ जाती है। फैसला लेने में वो अक्षम हो जाता है। इसमें और गिरावट आती है। इसके बाद वो साइकोजेनिक मौत की ओर चला जाता है।

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