लाश बन गई अंजीर का पेड़, तब जाकर खुला 40 साल पहले हुई हत्या का राज !

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निकोसिया (साइप्रस)। दुनिया में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिनमें मौत और उससे जुड़े रहस्य पर से पर्दा दशकों बाद हटा है। ऐसा ही एक अजीबो-गरीब वाकया साइप्रस में सामने आया है। ‘मिरर’ में छपी एक खबर के अनुसार, एक शख्स की मौत 1974 में हुई थी, लेकिन उसके बाद से उसकी लाश नहीं मिली। हालांकि, जहां उस शख्स की मौत हुई थी, कई दशक बाद वहां उस गुफा में एक पेड़ उग गया। लोगों के लिए यह रहस्य था कि यह पेड़ यहां कैसे उगा। लंबे रिसर्च के बाद पता चला कि दरअसल मृत शख्स के पेट में अंजीर के कुछ बीज थे, जिनसे यह पेड़ उगा। पढ़ने में यह कहानी अजीब जरूर लग सकती है, लेकिन ये बिलकुल सच है।

क्‍या था मामला ?

दरअसल, ‘मिरर’ की खबर के मुताबिक 40 साल पहले 1974 में अहमेट हर्ग्यूनर (Ahmet Herguner) नाम के एक शख्स को ग्रीक और टर्किश संघर्ष के दौरान मार दिया गया था। कई सालों तक उसकी लाश नहीं मिली। खबर के मुताबिक, हर्ग्यूनर और एक अन्‍य शख्‍स को संघर्ष के दौरान गुफा के अंदर डायनामाइट से उड़ा दिया गया था। उस दौरान गुफा में एक छेद बन गया। छेद से सूरज की रोशनी उस अंधेरी गुफा में पहुंचने लगी और हर्ग्यूनर के पेट में पड़े अंजीर के बीज को पनपने का मौका मिल गया। फिर क्‍या था, देखते ही देखते पौधा एक बड़ा अंजीर का पेड़ बन गया। जब छानबीन की गई तब हर्ग्यूनर की मौत का रहस्‍य दुनिया के सामने आया।

कैसे सामने आया राज ?

असल में गुफा से पेड़ उगने के बाद वर्ष 2011 में सबसे पहले एक शोधकर्ता का ध्‍यान उस पेड़ की तरफ गया। शोधकर्ता इस बात से हैरान था कि आखिर गुफा के अंदर से पेड़ कैसे निकल सकता है और वो भी ऐसे पहाड़ी इलाके में जहां आमतौर पर अंजीर के पेड़ पाए ही नहीं जाते हैं। उसने इसका पता लगाने का निश्‍चय किया। पेड़ के आसपास खुदाई की गई और इस तरह वहां लाश के दबे होने की बात सामने आई। पुलिस ने जब और खुदाई की तो गुफा के अंदर से कुल तीन लाशें मिलीं। जांच के दौरान पता चला कि अहमेट हर्ग्यूनर और दो अन्‍य लोगों को गुफा के अंदर डायनामाइट से उड़ाया गया था। धमाके की वजह से गुफा में छेद हो गया। कहा जा रहा है कि मरने से पहले हर्ग्यूनर ने अंजीर खाया होगा।

क्‍या कहना है हर्ग्यूनर की बहन का ?

हर्ग्यूनर की बहन मुनूर हर्ग्यूनर का कहना है, ‘हम जिस गांव में रहते थे वहां करीब 4,000 लोग थे। इनमें आधी आबादी ग्रीक और आधी आबादी तुर्की की थी। 1974 में तनाव शुरू होने के बाद मेरा भाई टर्किश रसिस्‍टेंट ऑर्गेनाइजेशन में शामिल हो गया था। 10 जून को ग्रीक मेरे भाई को उठा ले गए। हमने अपने भाई को बहुत खोजा लेकिन वो नहीं मिला। मुनूर ने कहा, ‘हमारे ब्‍लड सैंपल लाश के डीएनए से मैच हो गए और तब जाकर हमें पता चल पाया कि हमारे भाई ने अपना आखिरी वक्‍त कहां गुजारा था। वास्‍तव में अंजीर के पेड़ की वजह से हमें हमारे भाई के बारे में पता चल पाया।’

अबतक मिले हैं 890 लोगों के अवशेष

बता दें कि साइप्रस ने वर्ष 1981 में उन दो हजार लोगों की खोज के लिए एक कमेटी का गठन किया था, जो वर्ष 1963 से 1974 के बीच गायब हो गए थे। कमेटी को लापता लोगों की लिस्‍ट बनाने के अलावा यह भी पता करना था कि उन लोगों के साथ आखिर हुआ क्‍या?  लापता लोगों का पता लगाने के लिए 1,222 बार खुदाई अभियान चलाए गए, लेकिन सिर्फ 26 फीसदी मामलों में ही अवशेष मिल पाए। शोधकर्ताओं की टीम पिछले 12 सालों में अहमेट हर्ग्यूनर समेत 890 लोगों के अवशेष ही बरामद कर पाई है।

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