भारत दुनिया की छठी आर्थिक महाशक्ति, लेकिन ग्रामीणों के लिए नहीं

31 0

नई दिल्ली। भारत भले ही फ्रांस को पछाड़कर दुनिया की छठी आर्थिक ताकत बन गया हो, लेकिन गरीबों के लिए इसका कोई मतलब नहीं। हालत ये है कि औसत तौर पर एक ग्रामीण इलाके में हर महीने आमदनी और खर्च में इतना बड़ा अंतर है कि लोगों के पास बस मुट्ठीभर पैसा ही बच पाता है।
 
सर्वे से हुआ खुलासा

सरकारी संस्थान नाबार्ड के सर्वे में खुलासा हुआ है कि औसत तौर पर भारत के ग्रामीण इलाकों में हर परिवार को जो आमदनी होती है, उससे खर्च करने के बाद हर महीने 1 हजार 413 रुपए ही बचते हैं। अब जरा सोचिए कि इस पैसे से भला वो अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए क्या खरीद सकते हैं ?

प्रति व्यक्ति आय का हाल

नाबार्ड का सर्वे कहता है कि आंध्र प्रदेश, झारखंड, बिहार के गांवों में सबसे ज्यादा गरीब रहते हैं। आंध्र का हाल तो ये है कि प्रति व्यक्ति आय में वो 29 राज्यों में 15वें नंबर पर है। यहां औसतन हर ग्रामीण परिवार के बाद महीने के खर्च के बाद महज 95 रुपए ही बचते हैं।

आय और खर्च का आंकड़ा

नाबार्ड के सर्वे के मुताबिक 2016-17 में कृषि से ग्रामीण परिवार को 8931 रुपए मिलते हैं और खर्च होते हैं 7152 रुपए। जबकि, गैर कृषि कार्य से 7269 रुपए की आय होती है और 6187 रुपए खर्च होते हैं। औसत देखें, तो ग्रामीण इलाकों में परिवार की आय 8059 रुपए और 6646 रुपए खर्च होते हैं। यानी औसतन हर परिवार के पास महज 1413 रुपए ही बचते हैं।

कर्ज का मकड़जाल

ग्रामीण इलाकों में लोग कर्ज के मकड़जाल में भी घिरे हैं। सर्वे के मुताबिक हर ग्रामीण परिवार पर औसतन 1 लाख 3 हजार रुपए का कर्ज है। यानी 68.8 फीसदी भारतीय गरीब हैं।

पंजाब और केरल में सबसे ज्यादा खर्च

सर्वे कहता है कि पंजाब के गांवों में प्रति परिवार हर महीने 11707 रुपए खर्च होते हैं। ये भारत में सबसे ज्यादा है। वहीं, केरल में 11156 रुपए प्रति ग्रामीण परिवार खर्च है। पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में हर महीने का खर्च राष्ट्रीय औसत यानी 6646 रुपए से भी कम है। ग्रामीण इलाकों की बात करें, तो हर व्यक्ति खुद पर औसतन 1375 रुपए से भी कम खर्च कर पाता है। जिन परिवारों के पास 0.01 हेक्टेयर से कम खेती की जमीन है, उनकी औसत मासिक आय 8136 रुपए है। जबकि, 2 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन वालों की औसत मासिक आय 16 हजार रुपए से ज्यादा है।

भोजन से अलग काम के लिए भी पैसा नहीं

नाबार्ड का सर्वे कहता है कि अमीर परिवार भोजन से अलग काम के लिए आय का 54 फीसदी रकम खर्च करते हैं। जबकि, गरीब परिवार इस मद में 46 फीसदी खर्च करते हैं। यानी उनका ज्यादातर पैसा भोजन में ही खर्च हो जाता है।

Related Post

फेसबुक के नकारात्मक प्रभावों के लिए जुकरबर्ग ने माफी मांगी

Posted by - October 3, 2017 0
फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने इस सोशल-मीडिया प्लेटफॉर्म के नकारात्मक प्रभावों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है …

हंगामे के कारण संसद में नहीं हो सका सचिन का ‘डेब्यू’ भाषण

Posted by - December 21, 2017 0
विपक्ष के जोरदार हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित हुई नई दिल्‍ली। पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *