SC का अहम फैसला : पार्टियां मीडिया के जरिए बताएं कि उनका उम्मीदवार है दागी

328 0
  • कोर्ट ने कहा – दोषी करार हुए तभी चुनाव लड़ने पर रोक,  ले‍किन संसद इस मसले पर बनाए कानून

नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट ने दागी नेताओं के चुनाव लड़ने से रोकने वाली जनहित याचिकाओं पर मंगलवार (25 सितंबर) को फैसला सुना दिया। अपने अहम फैसले में कोर्ट ने नेताओं के दोषी ठहराए जाने से पहले उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन इसके लिए एक गाइडलाइन जारी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अयोग्यता का प्रावधान अदालत नहीं जोड़ सकती। यह काम संसद का है।

क्‍या कहा सर्वोच्‍च अदालत ने ?

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संविधान पीठ ने कहा – ‘राजनीति में अपराधीकरण और भ्रष्टाचार, लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को चाहिए कि इस मामले में प्रावधान बनाने के बारे में सोचे। पीठ ने कहा कि अब इस पर कानून बनाने का वक्त आ गया है ताकि आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को सदन में जाने से रोका जा सके। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले को संसद के पाले में डाल दिया है।  बता दें कि पीठ ने 28 अगस्त को सुनवाई के बाद इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

जारी किए दिशानिर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने दागी नेताओं को चुनाव लड़ने से तो नहीं रोका लेकिन सख्ती जरूर दिखाई है। कोर्ट ने राजनीति के अपराधीकरण पर चिंता जताते हुए इस बारे में काफी कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं। आइए जानते हैं ये दिशानिर्देश क्‍या हैं –

  • कोर्ट ने कहा है कि राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के नामांकन के बाद कम से कम तीन बार प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए उनके आपराधिक रिकॉर्ड का प्रचार करें।
  • कोर्ट ने कहा कि जिन कैंडिडेट के खिलाफ क्रिमिनल केस पेंडिंग हो, वह नामांकन के वक्त जब हलफनामा जब दाखिल करें तो क्रिमिनल केस के बारे में बोल्ड अक्षरों में लिखें।
  • राजनीतिक दल अपने उम्मीदवार के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी पार्टी की वेबसाइट पर डालें।
  • वोटर को इस बात का पूरा अधिकार है कि वह जाने कि कैंडिडेट का क्रिमिनल रिकॉर्ड क्या है।

वकालत करने पर रोक नहीं

याचिकाओं में आरोपी विधायकों और सांसदों के वकालत करने पर भी रोक लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सांसद और विधायक फुल टाइम सैलरी पाने वाले कर्मचारी नहीं हैं। इसी वजह से बार काउंसिल ने भी उन पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। पीठ ने बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय की उस जनहित याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा था जिसमें सांसद, विधायक के विधायिका में कार्यकाल के दौरान अदालतों में वकालत करने पर पाबंदी लगाने की मांग की गई है।

वर्तमान में 186 सांसदों पर है आपराधिक केस

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 में चुने गए सांसदों में से 186 सांसदों पर आपराधिक केस दर्ज था। इसके लिए एडीआर ने 543 में से 541 सांसदों के एफिडेविट का विश्‍लेषण किया था। एडीआर की रिपोर्ट में बताया गया कि 2004  से ऐसे सांसदों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। 2004 में 24% और 2009 में 30% सांसद ऐसे थे जिनके ऊपर आपराधिक मामले दर्ज थे।

Related Post

हाईप्रोफाइल सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, नामी होटल से पकड़ी गईं 2 एक्ट्रेस

Posted by - December 17, 2017 0
पुलिस ने देह व्यापार रैकेट की सूचना पर हैदराबाद में ताज डेक्कन होटल के कमरों में मारा छापा हैदराबाद। पुलिस…

सर्वे : महिलाओं के लिए सीरिया-अफगानिस्तान से भी ज्यादा असुरक्षित है भारत

Posted by - June 27, 2018 0
थॉमसन रॉयटर्स फांउडेशन ने जारी किए सर्वे के नतीजे, पश्चिमी देशों में सिर्फ अमेरिका का नाम लंदन। पूरी दुनिया में भारत को…

अमेरिकी इकोनॉमिस्‍ट रिचर्ड थेलर को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार

Posted by - October 9, 2017 0
थेलर ने अपने काम के जरिए अर्थशास्त्र और मनोविज्ञान के बीच की खाई पाटने की कोशिश की स्टॉकहोम। अर्थशास्त्र को मानवीय…

हनीप्रीत के नाम अरबों की बेनामी संपत्तियां, पुलिस के हाथ लगे कई दस्‍तावेज

Posted by - October 17, 2017 0
चंडीगढ़। डेरा मुखी राम रहीम की गोद ली बेटी हनीप्रीत के नाम अरबों रुपये की बेनामी संपत्तियों का पता चला…

भाजपा ने दलितों-पिछड़ों के प्रति सोच नहीं बदली तो अपना लूंगी बौद्ध धर्म : मायावती

Posted by - October 24, 2017 0
बसपा प्रमुख ने बीजेपी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘जातिवादी एजेंडे‘ को आगे बढ़ाने का लगाया आरोप आजमगढ़। बहुजन समाज पार्टी…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *