इस भारतीय इंजीनियर ने डीजल जेनरेटर से निकलने वाले धुएं से बना दी स्याही, तैयार की ये डिवाइस

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नई दिल्ली। भारत में छोटे-बड़े शहरों में मल्टीपलेक्स अपार्टमेंट्स, बड़े भवन परिसरों, शादी-ब्याह, समारोह में बिजली गुल होने पर बड़े-बड़े डीजल जेनरेटरों का इस्तेमाल किया जाता है। डीजल इंजन से निकलने वाला काला धुआं हवा को और ज्यादा प्रदूषित करता है। भारतीय इंजीनियर अर्पित धूपर ने इस धुएं का कुछ ऐसा इस्‍तेमाल किया, जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

धुएं से बना दी स्‍याही

आईआईटी दिल्ली के छात्र रहे अर्पित धुपर ने अपनी टीम के साथ मिलकर वर्ष 2016 में चक्र इनोवेशन के नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया था। उन्‍होंने डीजल जेनरेटर से निकलने वाले धुएं से होने वाले प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए एक डिवाइस तैयार की। अर्पित ने इस डिवाइस को नाम दिया ‘चक्र शील्ड’। इस डिवाइस के जरिए कार्बन को छानकर कर इससे स्याही बनाई जाती है। इसे अपनी तरह का पहला आविष्कार माना गया है। कंपनी अब तक दिल्ली के 53 सरकारी दफ्तरों और कॉलोनियों में यह डिवाइस लगा चुकी है।

कैसे काम करती है डिवाइस

इस डिवाइस को सीधे डीजल जेनरेटर के साइलेंसर में फिट किया जा सकता है। यह एक तरह का फिल्‍टर है, जो जेनरेटर से निकलने वाले धुएं से सारा कार्बन सोख लेता है। इसके बाद जमा किए हुए कार्बन को स्याही और पेंट में तब्दील कर दिया जाता है।

क्या कहते हैं अर्पित

अर्पित धूपर कहते हैं, हमारा लक्ष्य बड़े शहरों में बहुत जल्दी प्रदूषण के स्तर को काफी नीचे लाना है। उन्होंने बताया कि इंडियन ऑयल ने इस प्रोजेक्ट को फंड भी मुहैया कराया है। वहीं, बीएसएनएल, एमटीएनएल. आईआईटी दिल्ली, अमेरिकन टॉवर सहित महानगर की कुछ कंपनियों ने इस डिवाइस के लिए हमारी सेवाएं ली हैं।

मिल चुके हैं कई अवॉर्ड्स

इस इनोवेशन को अबतक भारत सरकार का ग्रोथ प्रोग्राम अवार्ड, ईकोइंग ग्रीन फेलोज अवार्ड, फिक्की-बेस्ट ईको-इनोवेशन स्टार्टअप अवार्ड, अमेरिकन सोसाइटी अवार्ड फॉर मैकेनिकल इंजीनियरिंग, यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो-अर्बन लैब्स इनोवेशन चैलेंज अवार्ड, आईआईटी दिल्ली- ईडीसी स्टार्टअप अवार्ड और स्मोगेथॉन-राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।

 

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