रेवाड़ी गैंगरेप : सेना के जवान समेत फरार दोनों मुख्य आरोपी भी पुलिस के शिकंजे में

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रेवाड़ी। रेवाड़ी में छात्रा से गैंगरेप मामले में एसआईटी को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। एसआईटी ने मामले में फरार चल रहे दो मुख्य आरोपियों सेना के जवान पंकज और मनीष को भी रविवार (23 सितंबर) को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को SIT टीम ने महेंद्रगढ़ के सतनाली गांव से गिरफ्तार किया है।

दोनों से हो रही पूछताछ 

बता दें एसआईटी टीम ने दोनों आरोपियों को नाहड़ रेस्ट हाउस में रखा है। दोनों आरोपियों से एसआईटी और हरियाणा पुलिस के अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस ये भी जानने का प्रयास कर रही है कि फरारी के दौरान किन-किन लोगों ने इन्हें छिपाने में मदद की। वारदात में और कितने लोग शामिल हैं। आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद शाम तक पुलिस इन्हें कोर्ट में पेश करेगी। कोर्ट में दोनों आरोपियों की रिमांड की मांग भी की जा सकती है।

अबतक 5 लोग गिरफ्तार

बता दें कि दिलदहला देनी वाली इस घटना में पुलिस पहले ही एक मुख्य आरोपी निशु समेत दो अन्य आरोपियों डॉ. संजीव और दीन दयाल को गिरफ्तार कर चुकी है। निशु को 21 सितंबर को कोर्ट ने चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया था। वहीं डॉ. संजीव और दीन दयाल न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस निशु की निशानदेही पर उसके घर से मोबाइल भी बरामद कर चुकी है। इससे पहले पुलिस निशु को लेकर उन स्थानों पर भी गई थी जहां पर सामूहिक दुष्कर्म को अंजाम दिया गया था।

क्‍या था मामला ?

यह घटना 12 सितंबर की है। उस दिन छात्रा घर से कोचिंग जाने के लिए निकली थी। रास्‍ते में आरोपियों ने उसका अपहरण कर लिया और छात्रा को खेत में बने ट्यूबवेल के एक कमरे में बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म किया था। परिजनों का आरोप है कि आरोपियों ने दुष्‍कर्म से पहले पीडि़ता को नशीला पदार्थ भी पिलाया था। गिरफ्तार तीनों आरोपी पीडि़ता के गांव के ही रहने वाले हैं। दुष्कर्म के बाद छात्रा की तबितय बिगड़ने पर आरोपियों ने डॉ. संजीव को बुलाकर उसका प्राथमिक उपचार भी कराया था, लेकिन डॉ. संजीव ने पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी थी। पीड़िता के परिवार ने पूरी वारदात में 10 से 12 लोगों के शामिल होने की आशंका जताई थी।

महिला आयोग ने उठाए थे सवाल

इस मामले में 21 सितंबर को राष्ट्रीय महिला आयोग ने हरियाणा पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। महिला आयोग के अनुसार, इतने संगीन केस में भी पुलिस ने हर कदम पर लापरवाही बरती थी। पुलिस ने 12 सितंबर को हुई घटना की जीरो एफआईआर 13 सितंबर की सुबह दर्ज की थी। यही नहीं, पुलिस ने मौका-ए-वारदात को सील भी नहीं किया था। इस वजह से सटीक फॉरेंसिक नमूने भी नहीं मिल पाए।

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