ऑस्कर के लिए नामित हुई असमिया फिल्म Village Rockstar, ‘पैडमैन’ व ‘मंटो’ रह गईं पीछे

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मुंबई। असम की फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार’ को ऑस्कर-2019 के लिए ऑफीशियल एंट्री मिल गई है। कन्नड़ फिल्‍म निर्माता राजेंद्र सिंह बाबू की अध्यक्षता में फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) द्वारा गठित ऑल इंडिया जूरी ने शनिवार (22 सितंबर) को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह ऐलान किया। बता दें कि 91वें अकादमी पुरस्कार अगले साल 24 फरवरी, 2019 को दिए जाएंगे।

किन फिल्‍मों का हुआ था नामांकन ?

इस बार ऑस्कर 2019 के लिए दीपिका पादुकोण और रणबीर सिंह की ‘पद्मावत’, अक्षय कुमार की ‘पैडमैन’, आलिया भट्ट की ‘राजी’, नवाजुद्दीन सिद्दीकी की हालिया रिलीज हुई ‘मंटो’, वरुण धवन की ‘अक्टूबर’, मनोज बाजपेयी और रिचा चड्ढा की ‘लव सोनिया’, अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर की ‘102 नॉट आउट’, रानी मुखर्जी की फिल्म ‘हिचकी’ के अलावा कुछ क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों का भी ऑस्कर के लिए नामांकन हुआ था, लेकिन बाजी असमिया फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार्स’ ने मारी है।

नेशनल अवार्ड जीत चुकी है फिल्‍म

बता दें कि सिनेमा में विशेष योगदान के लिए 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2018 (National Film Awards 2018) में ‘विलेज रॉकस्टार्स’ को बेस्‍ट फीचर फिल्‍म का अवार्ड मिल चुका है। इस फिल्‍म का निर्देशन रीमा दास ने किया है। 29 साल बाद किसी असमिया फिल्‍म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है।  इससे पहले वर्ष 1987 में जाहनु बरुआ की ‘हलोधिया चोरये बोधन खई’ ने राष्‍ट्रीय पुरस्कार जीता था।

क्‍या है फिल्‍म की कहानी ?

असम के गुवाहाटी के निकट छायगांव की पृष्ठभूमि पर फिल्माई गई फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार्स’ गरीब लेकिन अद्भुत बच्चों की कहानी है, जो मजेदार जीवन का लुत्‍फ उठाते हैं। फिल्म का एक रॉक बैंड के रूप में बच्चों के साथ आगाज होता है। इसे बहुत ही मजाकिया अंदाज में पेश किया गया है। दरअसल ‘विलेज रॉकस्टार’ 10 वर्षीय धुनू की कहानी है जिसकी देखरेख उसकी विधवा मां करती है। उसे गरीबी में धुनू का पालन-पोषण करना पड़ा और बार-बार प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन वह एक मजबूत शख्सियत वाली महिला है। उसकी दृढ़ता, समझौता न करने की प्रवृत्ति उसे और अधिक मजबूत बना देती है। रीमा दास को ‘विलेज रॉकस्टार’ के जरिए एक बार फिर अपनी जड़ों से जुड़ने का मौका मिला है।

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