रिसर्च में खुलासा : प्लाटिक भी खा रहे हैं मच्छर, बिगाड़ रहे हैं फूड चेन

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नई दिल्ली। एक ताजा अध्‍ययन में खुलासा हुआ है कि गंदे पानी में पनपने वाले मच्छरों के लार्वा माइक्रोप्लास्टिक खा रहे हैं, जिससे हमारी फूड चेन खराब हो रही है। इससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। माइक्रोप्लास्टिक, प्लास्टिक के ऐसे छोटे-छोटे टुकड़े होते हैं जो इंसानों के जमा किए गए कचरे से बनते हैं। ये माइक्रोप्‍लास्टिक दुनिया भर के समंदरों में जाकर मिल रहे हैं, जिससे हमारे पर्यावरण को गंभीर खतरा उत्‍पन्‍न होने की आशंका है।

ऐसे की गई रिसर्च

यह अध्‍ययन अमेरिका के रीडिंग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने की है। प्रमुख शोधकर्ता बॉयोलॉजिकल साइंटिस्ट डॉ. कैलाघन की टीम ने पानी में रहने वाले 150 मच्छरों को खाने में माइक्रोप्लास्टिक मिलाकर दिया। 150 मच्छरों में से उन्होंने 15 मच्छरों को सेलेक्ट किया जो लार्वा के स्टेज में थे। इसके बाद उन्होंने 15 दूसरे मच्छरों को सेलेक्ट किया, जो बड़े हो चुके थे। इन 30 मच्छरों में उन्हें माइक्रोप्लास्टिक के कण मिले।

क्या कहना है रिसर्चर्स का

शोधकर्ताओं का कहना है कि उनके पास पहली बार इस बात के सबूत आए हैं कि माइक्रो प्लास्टिक मच्छर और अन्य कीड़ों के माध्यम से हवा से हमारे Ecosystem में प्रवेश कर सकते हैं। रिसर्चर्स ने पाया कि मच्छरों के लार्वा माइक्रो प्लास्टिक को खा रहे हैं। इसका मतलब है कि जो भी जंगली जीव उन उड़ने वाले कीड़ों को खा रहे हैं, वे भी उस प्लास्टिक को पचा रहे हैं।

ऐसे चल रही है साइकिल

इस स्टडी की प्रमुख शोधकर्ता और अमांडा कैलाघन ने बताया कि कई किस्म के कीड़े पानी में रहते हैं और उनकी भी मच्छरों के लार्वा के जैसी लाइफ साइकिल है। वे लार्वा पानी में पड़ी चीजें खाते हैं और फिर वयस्क हो जाते हैं। ऐसे कीड़ों को खाने वाले कई जानवर हैं, जिनमें चमगादड़ और मकड़ियों की कई प्रजातियां शामिल हैं।

क्या कहना है डॉ. कैलाघन का

डॉ. कैलाघन का कहना है कि यह प्रदूषण का एक नया रास्ता है, जो इससे पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि हालांकि टीम ने लैब कंडीशन में इस स्थिति को देखा है, मगर बहुत हद तक संभव है कि यह प्रक्रिया जंगल में पहले से चल रही हो। यह एक बड़ी समस्या है और इसके प्रति समय रहते सचेत होने की जरूरत है।

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