तीन तलाक पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, केंद्रीय कैबिनेट ने दी अध्यादेश को मंजूरी

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नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने तीन तलाक बिल पर बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार (19 सितंबर) को तीन तलाक के अध्यादेश को मंजूरी दे दी। तीन तलाक देना अब अपराध माना जाएगा। यह अध्यादेश छह महीने तक लागू रहेगा। इस दौरान सरकार को इसे संसद से पारित कराना होगा। 

राज्‍यसभा से नहीं पास हो पाया था बिल

बता दें कि तीन तलाक बिल इससे पहले संसद के बजट सत्र और मानसून सत्र में पेश किया गया था। लोकसभा से पारित होने के बाद यह बिल राज्यसभा में अटक गया था। कांग्रेस समेत अन्य दलों ने विधेयक में संशोधन की मांग की थी। हालांकि संशोधन के बाद भी यह विधेयक राज्यसभा से पारित नहीं हो पाया था। नए बिल में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के मामले को गैर जमानती अपराध माना गया है लेकिन संशोधन के बाद अब मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा।

क्‍यों लाए अध्‍यादेश ?

केंद्र सरकार ने तीन तलाक पर अध्यादेश लाने के कारण बताते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए इसे लाना जरूरी था। कैबिनेट के फैसले के बाद केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मीडिया से मुखातिब हुए। उन्होंने कहा, ‘भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष मुल्क में बड़ी संख्या में महिलाओं के साथ नाइंसाफी हो रही थी। तीन तलाक का यह मुद्दा नारी न्याय और नारी गरिमा का मुद्दा है। देश की मुस्लिम महिलाएं इससे परेशान हैं।’

कांग्रेस को निशाने पर लिया

रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि वोट बैंक के दबाव में कांग्रेस ने तीन तलाक बिल को समर्थन नहीं दिया। उन्होंने अपील की कि सोनिया गांधी, ममता बनर्जी और मायावती को इस मुद्दे पर सरकार का साथ देना चाहिए। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को रद्द करते हुए कहा था कि केंद्र इस मामले पर छह महीने में कानून बनाए।

तीन तलाक के मसौदे में 3 अहम संशोधन 

  • कानून मंत्री ने बताया कि अपराध संज्ञेय तभी होगा, जब खुद पीड़ित महिला या उसके परिजन इसकी शिकायत करेंगे। पड़ोसी या कोई अनजान शख्स इस मामले में केस दर्ज नहीं करा सकता है।
  • सिर्फ पीड़िता पत्‍नी चाहेगी तभी इस मामले में समझौता होगा। मजिस्ट्रेट इसे उचित शर्तों के साथ मंजूरी दे सकते हैं।
  • मजिस्ट्रेट पत्‍नी के आरोप की सुनवाई के बाद इस मामले में बेल दे सकते हैं।

यूपी में सबसे अधिक मामले

रविशंकर प्रसाद ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट से पहले 229  तीन तलाक के मामले सामने आए थे और कोर्ट के फैसले के बाद 201 मामले सामने आए। ये संख्या जनवरी 2017 से 13 सितंबर, 2018 तक है।  उन्होंने कहा कि तीन तलाक के सबसे अधिक मामले यूपी में सामने आ रहे हैं। यूपी में जनवरी 2017 से जजमेंट से पहले 126  केस और जजमेंट के बाद 120 केस सामने आए हैं।

कांग्रेस ने साधा निशाना, JDU असहज

तीन तलाक अध्‍यादेश को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार इसे मुस्लिम महिलाओं के लिए न्याय का मुद्दा नहीं बना रही है, बल्कि सरकार इसे राजनीतिक मुद्दा बना रही है। वहीं,  अध्‍यादेश को मंजूरी मिलने के बाद एनडीए में सहयोगी दल जदयू असहज हो गया है। जदयू महासचिव आरसीपी सिंह ने कहा है कि तीन तलाक के मुद्दे पर आम सहमति बनाए जाने की जरूरत है। सभी लोगों की राय लेकर ही कानून बनना चाहिए। वहीं, बिहार के कांग्रेस नेता और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा है कि उन्माद फैला कर राजनीति की जा रही है। उन्होंने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा, ‘अल्पसंख्यकों के लिए आपकी जो हमदर्दी है, वह सिर्फ तीन तलाक के लिए ही क्यों है? गरीब अल्पसंख्यकों के लिए यह हमदर्दी क्यों नहीं है? शिक्षा और रोजगार के लिए हमदर्दी क्यों नहीं है?’

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