कम प्रदूषण भी दिल के लिए खतरनाक, कभी भी हो सकता है हार्ट फेल

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लंदन। हवा में प्रदूषण से दिल की बीमारी का खतरा तो होता है, लेकिन क्या हवा में प्रदूषण कम हो, तो भी इसका दिल पर असर पड़ता है ? इस पुराने सवाल का जवाब आखिरकार मिल गया है। ब्रिटेन में हुई ताजा रिसर्च के मुताबिक हवा में प्रदूषण चाहे कम भी हो, लेकिन इसका भी दिल की बीमारी से सीधा संबंध है और इससे कभी भी हार्ट फेल हो सकता है।

दिल पर प्रदूषण का खतरनाक असर
रिसर्च करने वाली टीम ने 3920 वयस्कों के दिल का एमआरआई कराया। इन लोगों को पहले दिल की बीमारी नहीं रही। रिसर्च करने वालों ने पाया कि हवा में मौजूद पीएम2.5 कणों, धुएं और खतरनाक नाइट्रोजन डाईऑक्साइड गैस की वजह से सभी लोगों के दिल सामान्य से बड़े हो गए। रिसर्च करने वाली टीम के प्रमुख ने आंग के मुताबिक कम प्रदूषण की वजह से भी दिल के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा होने का पता चला है।

दिल में ये बदलाव भी लाता है प्रदूषण
आंग ने बताया कि जो लोग ज्यादा वायु प्रदूषण के बीच रहते हैं, उनके दिल में खून को पंप करने वाले चेंबर बड़े हो जाते हैं। जिन लोगों के दिल में ये बदलाव आता है, उनमें अचानक मौत की आशंका काफी बढ़ जाती है। आंग के मुताबिक विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि पीएम2.5 कणों की ऐसी कोई संख्या नहीं होती, जिसे खतरनाक न माना जाए।

दिल के आकार में ये हुआ बदलाव
रिसर्च से पता चला कि औसतन 5.2 साल में जो लोग प्रति घन मीटर 1 माइक्रोग्राम पीएम2.5 के बीच रहे और प्रति घन मीटर 10 माइक्रोग्राम नाइट्रोजन डाईऑक्साइड वाली हवा लेते रहे, उनके दिल 1 फीसदी ज्यादा बड़े हो गए।

ऐसे होता है हार्ट फेल
हार्ट फेल उस वक्त होता है, जब दिल के कमजोर होने की वजह से शरीर में पूरी तरह खून का दौरा नहीं हो पाता। इसके संकेतों में बेहोशी, जलीय चीज लेने से वजन बढ़ना, सांस लेने में दिक्कत, खांसी वगैरा शामिल हैं। ऐसे संकेत मिलने पर डॉक्टर से चेकअप कराके दवा लेकर दिक्कतों को दूर किया जा सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि जब लोग हवा में प्रदूषण के बीच वक्त गुजारते हैं, तो इससे उनके फेफड़ों में सूजन आती है और हवा में मौजूद छोटे कण खून में घुल जाते हैं। इस वजह से दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

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