1990 के मुकाबले ज्यादा भारतीयों की हो रही दिल की बीमारियों से मौत

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नई दिल्ली। स्वास्थ्य संबंधी जर्नल द लैनसेट में छपी एक रिसर्च के मुताबिक 1990 के मुकाबले 2016 में दिल की बीमारियों से मरने वालों की संख्या में 28 फीसदी का इजाफा हुआ है। जबकि, 1990 में दिल की बीमारियों से मरने वाले महज 15 फीसदी लोग थे।

इतने लोगों को हो रही दिल की बीमारी

लैनसेट में छपी रिसर्च कहती है कि 1990 में 13 लाख लोगों की मौत दिल की बीमारियों से हुई थी। जबकि, 2016 में 28 लाख लोगों की मौत की वजह दिल की बीमारी रही। 2016 में दिल की बीमारी से मरने वाले लोगों में करीब आधे 70 साल की कम उम्र के थे। मरने वालों में दिल की बीमारी के साथ धमनियों के सिकुड़ने, इशेमिक हार्ट डिजीज और स्ट्रोक पाए गए।

इस वजह से सबसे ज्यादा मौतें

रिसर्च के मुताबिक इशेमिक हार्ट डीजीज से 2016 में 17.8 फीसदी की मौत हुई। जबकि, स्ट्रोक से 7.1 फीसदी लोग मारे गए। रूमेटिक फीवर की वजह से भी लोगों को दिल की बीमारी हुई और इससे 1.1 फीसदी की मौत हुई। दिल की बीमारी से ग्रस्त लोगों की तादाद भी काफी बढ़ी है। 1990 में करीब ढाई करोड़ लोगों को दिल की बीमारी थी। जबकि अब करीब साढ़े 5 करोड़ लोगों को दिल की बीमारी है।

खतरे की ओर संकेत देती है रिसर्च

ये रिसर्च बताती है कि दिल की बीमारी से लोग कम उम्र में ही मौत के मुंह में समा रहे हैं और ये भारत में आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए सबसे गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

इस वजह से हो रही दिल की बीमारी

रिसर्च करने वालों के मुताबिक 54.4 फीसदी लोगों को गलत भोजन, 56.6 फीसदी को तनाव, 31 फीसदी को वायु प्रदूषण, 29.4 फीसदी के खून में कोलेस्ट्रॉल की बढ़ी मात्रा और 18.9 फीसदी में तंबाकू के सेवन से दिल की बीमारी होने की बात सामने आई है। तंबाकू उत्पाद लेने वाले जिन लोगों को दिल की बीमारी होती पाई गई है, उनमें से 83 फीसदी धूम्रपान की वजह से बीमार होते हैं।

सबसे ज्यादा दिल की बीमारी यहां

रिसर्च के मुताबिक केरल, पंजाब और तमिलनाडु में दिल की बीमारी से ग्रस्त सबसे ज्यादा लोग हैं। इन राज्यों में हर 1 लाख में से 5 हजार लोग इस तरह की बीमारी से पीड़ित हैं। वहीं, आंध्रप्रदेश, हिमाचल, महाराष्ट्र, गोवा और पश्चिम बंगाल में हर 1 लाख में से 4 हजार 999 को दिल की बीमारी है। कम विकसित बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मेघालय, असम, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और उड़ीसा में प्रति 1 लाख लोगों में 3 से 4 हजार लोग ही दिल की बीमारी से ग्रस्त हैं।
 
अमीरों को हो रही बीमारी
लैनसेट में छपी रिपोर्ट कहती है कि अमीरों में दिल की बीमारी सबसे ज्यादा हो रही है। यहां तक कि ग्रामीण इलाकों में भी जो लोग अमीर हैं, उनमें इस तरह की बीमारी देखी जा रही है। देश के 20 धनी जिलों में बीते 10 साल में दिल की बीमारी का प्रतिशत गरीब जिलों में रहने वालों के मुकाबले 13.1 की दर से बढ़ा है।

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