प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल की कीमतों का असर, इलेक्ट्रिक वीकल्स खरीदने में बढ़ी रुचि

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नई दिल्ली। बढ़ता प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने गाड़ी रखने वालों की सोच बदलनी शुरू कर दी है। एक सर्वे से पता चला है कि गाड़ी रखने वाले लोगों में से ज्यादातर अब बिजली से चलने वाले वाहन खरीदना चाहते हैं। इन लोगों का मानना है कि इससे जेब पर बोझ भी घटेगा और प्रदूषण भी कम होगा।

सर्वे से पता चला गाड़ी मालिकों का मूड
क्लाइमेट ट्रेंड्स सर्वे के नतीजों के मुताबिक 87 फीसदी गाड़ी मालिक प्रदूषण रोकने के लिए बिजली से चलने वाली गाड़ियां खरीदना चाहते हैं। जबकि, 12 फीसदी गाड़ी मालिक पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से निजात पाने के लिए बिजली वाली गाड़ियां खरीदने के बारे में गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ये सर्वे 2000 लोगों पर किया गया।

इलेक्ट्रिक वीकल्स की ओर बढ़ रहा है रुझान
साल 2017 में भारत में करीब 9 लाख इलेक्ट्रिक वीकल्स बेचे गए। ये पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों की तादाद का करीब 4 फीसदी है। बता दें कि भारत में जितना कार्बन उत्सर्जन होता है, उसका 11 फीसदी हिस्सा गाड़ियों के धुएं की वजह से है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस साल आई एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित 20 में से 14 शहर भारत में हैं।

ड्राइवर्स, मालिकों का ये है कहना
गाड़ियों के मालिक और ड्राइवर्स में से 76 फीसदी ने सर्वे में बताया कि वो, उनके दोस्त, परिवार के लोग और पड़ोसी पर्यावरण प्रदूषण का शिकार होते हैं। ऐसा कहने वालों की सबसे ज्यादा तादाद दिल्ली में रही। सर्वे में शामिल 91 फीसदी लोगों ने कहा कि हवा में प्रदूषण की वजह से उनकी, परिवार के लोगों की और पड़ोसियों की तबीयत खराब हो रही है। यही बात हैदराबाद में 78 फीसदी, चेन्नई में 75 फीसदी, मुंबई में 74 फीसदी, बेंगलुरु में 71 फीसदी और कोलकाता में 70 फीसदी लोगों ने कही।

किस तरह की बीमारी से परेशान हैं लोग
सर्वे में शामिल लोगों में से 55 फीसदी का कहना है कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत है। 51 फीसदी ने सिरदर्द और 51 फीसदी ने खांसी-जुकाम की बात कही। ये सारी बीमारियां दिल्ली समेत शहरी इलाकों में देखी गईं। जबकि, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले 18 से 24 साल के युवाओं में इस तरह की बीमारियां न के बराबर पाई गईं।

इस वजह से इलेक्ट्रिक वीकल्स नहीं खरीदते हैं लोग
सर्वे से सामने आया कि घरों के पास चार्जिंग स्टेशन न होने की वजह से लोग इलेक्ट्रिक वीकल्स नहीं खरीदते। 60 फीसदी ने यही बात बताई। जबकि 46 फीसदी ने कहा कि इलेक्ट्रिक वीकल्स लंबी दूरी तय नहीं करते। भारत में जो इलेक्ट्रिक वीकल्स बनते हैं, उनमें देर से चार्जिंग होने की बात 31 फीसदी लोगों ने बताई। साथ ही ऐसी गाड़ियां न खरीदने की बड़ी वजहों के तौर पर 26 फीसदी ने चमक-दमक की कमी और 25 फीसदी ने महंगा होना बताया।

गाड़ियों का तीसरा सबसे बड़ा मार्केट है भारत
बता दें कि भारत, दुनियाभर में गाड़ियों का तीसरा सबसे बड़ा मार्केट है। साल 2017 में भारत में ढाई करोड़ गाड़ियां बिकी थीं। इनमें से 80 फीसदी टू ह्वीलर थे। 2017 में जो इलेक्ट्रिक वीकल्स बेचे गए, उनमें 93 फीसदी थ्री ह्वीलर और 6 फीसदी टू ह्वीलर थे।

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