सुप्रीम कोर्ट ने सैरीडॉन समेत तीन दवाओं से हटाया प्रतिबंध, केंद्र को नोटिस

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (17 सितंबर) को सेरिडॉन समेत दो अन्य दवाइयों पर सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को हटा दिया है और फिलहाल इन्‍हें बाजार में बेचने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने यह फैसला दवा निर्माताओं की याचिका पर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं पर रोक लगाने के मामले में  केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।

क्‍या कहा गया है याचिका में ?

दरअसल, ये तीनों दवाएं 328  एफडीसी दवाओं की उस लिस्ट में शामिल हैं जिन्हें  केंद्र सरकार ने पिछले दिनों प्रतिबंधित कर दिया था। कई बड़ी फार्मा कंपनियों ने केंद्र के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए सरकार के निर्णय पर सवाल उठाए थे। याचिका में दलील दी गई थी कि सरकार के नोटिफिकेशन में इन दवाओं पर रोक के लिए केवल एक कारण ‘उपचार के काबिल नहीं’ दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सैरीडॉन के अलावा प्रिट्रान और डार्ट ड्रग्स पर लगे प्रतिबंध को हटाया है।

अधिकतर देशों में एफडीसी दवाओं पर प्रतिबंध

बता दें कि एफडीसी वो दवाएं हैं जो दो या दो से अधिक सॉल्ट को मिलाकर बनाई जाती हैं।  अमेरिका, जापान, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के साथ ही दुनिया के ज्‍यादातर देशों में इन दवाओं के उपयोग पर रोक है। वहीं भारत के साथ ही कई विकासशील देशों में ये दवाएं धड़ल्‍ले से बिकती हैं। देश में महज पुडुचेरी एक ऐसा राज्य है, जिसने एफडीसी पर रोक लगाई है।

रोक लगाने की हो रही थी मांग

देश में सक्रिय कई स्वास्थ्य संगठन लंबे समय से मांग कर रहे थे कि इन दवाओं से मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ होता है, इसलिए इन पर रोक लगानी चाहिए। जिन दवाओं पर रोक लगाई गई है, उनमें सेरिडॉन, कोरेक्स, सुमो, जीरोडॉल, फेंसिडील, जिंटाप, डिकोल्ड और कई तरह के ऐंटीबायॉटिक्स, पेन किलर्स, शुगर और दिल के रोगों की दवाएं शामिल हैं। इन बैन दवाओं में कई ऐसी हैं, जिन्हें लोग फटाफट आराम पाने के लिए खुद खरीद लेते हैं। कई दवाएं सिरदर्द, जुकाम, दस्त, पेट दर्द जैसी बीमारी में ली जाती हैं।

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