इस वजह से महिला वोटरों के होते हैं कम वोट, पार्टियां बनी रहती हैं उदासीन

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नई दिल्ली। इस साल नवंबर-दिसंबर में 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। अगले साल यानी 2019 में लोकसभा के चुनाव हैं। चुनाव जीतने के लिए सभी पार्टियां दम-खम दिखा रही हैं, लेकिन इन पार्टियों को शायद महिला वोटरों से कोई मतलब नहीं। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि आंकड़ों के मुताबिक भारत में महिलाएं कम वोट डालती हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया।

वोटर बढ़े, लेकिन वोट नहीं

भारत में महिला वोटरों की तादाद हालांकि बढ़ी है। 1980 में महिला वोटरों की तादाद 51 फीसदी थी। वहीं, 2014 में इनकी तादाद 66 फीसदी हो गई। बावजूद इसके लिंगानुपात के मामले में पुरुषों के मुकाबले कम होने की वजह से महिला वोटर भी कम ही हैं।

मध्यप्रदेश का हाल

इस साल जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें देश का दिल कहा जाने वाला बड़ा राज्य मध्यप्रदेश भी शामिल है। यहां साल 2014 में कम महिलाओं ने ही वोट डाले थे। जबकि, छोटे से राज्य अरुणाचल प्रदेश में पुरुषों से ज्यादा महिला वोटर हैं।

लिंगानुपात की तरह वोटर भी कम

जैसे देश में लिंगानुपात में बड़ा अंतर है। उसी तरह वोटरों में भी ये देखा जा रहा है। 2014 में संसद की 543 सीटों पर हुए चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि महिला वोटरों की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश में हर 10 में से 9 सीटों पर खराब स्थिति है। यहां हर 1000 पुरुष वोटरों पर महिला वोटरों की संख्या 169 ही है। इसके बाद गुजरात औऱ यूपी का नंबर है। बिहार, झारखंड, राजस्थान, हरियाणा वगैरा में भी पुरुष वोटरों के मुकाबले महिला वोटरों की संख्या काफी कम है।

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