श्रीलंका के हिंदू मंदिरों में अब नहीं होगी पशुओं की बलि, कानून बनाएगी सरकार

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कोलंबो। श्रीलंका सरकार अपने यहां हिंदू मंदिरों में पशुओं की बलि पर रोक लगाने के लिए कानून बनाने जा रही है। यह कानून बन जाने के बाद हिंदू मंदिरों में बकरियों, पक्षियों और पशुओं की बलि पर प्रतिबंध लग जाएगा। बता दें कि श्रीलंका में बहुसंख्यक बौद्ध समुदाय पिछले कई वर्षों से पशु बलि का विरोध कर रहे हैं। वे इसे अमानवीय बताते हैं।

कैबिनेट ने प्रस्‍ताव को दी मंजूरी

दरअसल, श्रीलंका के हिंदू धार्मिक मामलों के मंत्री डीएम स्वामीनाथन ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था। इस प्रस्‍ताव में पूजा के प्राचीन तरीकों पर प्रतिबंध लगाए जाने के लिए कानून बनाने की बात कही गई है। अधिकतर उदारवादी समूहों ने इसका समर्थन किया है। कैबिनेट ने दो दिन पहले इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बता दें कि इससे पहले कोर्ट के आदेश से द्वारा भी कई हिंदू मंदिरों में बलि प्रथा पर रोक लगती रही है.

कई सालों से हो रहा था विरोध

भारत की ही तरह श्रीलंका में भी कुछ हिंदू अपने देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए मंदिरों में बकरा, भैंसा और मुर्गियों की बलि देते हैं। हालांकि बौद्ध बहुसंख्यक आबादी वाले श्रीलंका में कई साल से हिंदू मंदिरों में होने वाली बलि प्रथा का विरोध हो रहा था। एनिमल राइट एक्ट‍िविस्ट, बौद्ध और कई उदारवादी हिंदू भी इसे अमानवीय बताते हैं। यही वजह है कि अब श्रीलंका की सरकार ने इस मामले में पहल की है।

300 सालों से है बलि की प्रथा

बता दें कि श्रीलंका में कई प्रसिद्ध और खूबसूरत हिंदू मंदिर हैं। इन मंदिरों में काफी विधि‍-विधान से पूजा की जाती है। वैसे तो हिंदुओं की अधिकतर आबादी बलि प्रथा में विश्वास नहीं करती,  लेकिन कुछ मंदिरों में होने वाले वार्ष‍िक आयोजनों में पिछले 300 सालों से बलि दी जा रही है। हिंदू अपने देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए मंदिरों में बकरा, भैंसा और मुर्गियों की बलि देते हैं।  श्रीलंका में हिंदू लगभग 12 प्रतिशत हैं।

समर्थकों ने जताया विरोध

वैसे तो ज्यादातर उदारवादी हिंदू बलि प्रथा का विरोध करते हैं, लेकिन कुछ हिंदू संगठनों ने इस प्रस्ताव को उनके धार्मिक अधिकारों और स्‍वतंत्रता पर प्रहार बताया है। पशु बलि का समर्थन करने वालों का कहना है कि ये उनकी आस्था का मामला है जो प्राचीन काल से जारी है, इसलिए इसे जारी रखा जाना चाहिए।  हालांकि विरोध के बावजूद श्रीलंका सरकार इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

मुसलमानों पर रोक नहीं

बता दें कि श्रीलंका में मुसलमानों की संख्‍या भी काफी है। यहां तीसरी सबसे बड़ी आबादी मुसलमानों की ही है। श्रीलंका में हिंदुओं के अलावा मुसलमान भी अपने कुछ धार्मिक आयोजनों में पशुओं की बलि देते हैं। हालांकि पशु बलि पर रोक के लिए संसद में लाए गए इस प्रस्ताव में उनके ऊपर रोक लगाने की बात नहीं की गई है।

संसद द्वारा पारित होने के बाद बनेगा कानून

बता दें कि मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर किए गए इस कानून के प्रस्‍ताव को अंतिम सहमति के लिए कानूनी ड्राफ्टसमैन विभाग के पास भेजा जाएगा। इसके बाद इसे अटॉर्नी जनरल के विभाग के पास भेजा जाएगा। इन प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद यह सरकार के राजपत्र में प्रकाशित होगा। उन्होंने बताया कि संसद द्वारा पारित किए जाने के बाद यह कानून प्रभावी होगा।

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