SC का आदेश – जासूसी कांड में बरी पूर्व इसरो वैज्ञानिक को दें 50 लाख रुपये मुआवजा

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नई दिल्ली। इसरो जासूसी कांड में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। इस मामले में जासूसी के आरोप से दोषमुक्त हुए इसरो के पूर्व वैज्ञानिक एस. नंबी नारायण को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (14 सितंबर) को बड़ी राहत देते हुए उन्‍हें 50 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दिया है। कोर्ट ने नंबी नारायण को फंसाने के मामले में केरल के पुलिस अफसरों की भूमिका की जांच के लिए एक न्यायिक कमेटी भी गठित की है।  

क्‍या कहा सर्वोच्‍च अदालत ने ?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस केस में वैज्ञानिक एस. नंबी नारायणन को 24 साल पहले केरल पुलिस ने बेवजह गिरफ्तार किया था। उन्हें परेशान किया गया और मानसिक प्रताड़ना दी गई। इसी के साथ कोर्ट ने जासूसी मामले में नारायणन को फंसाने की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायामूर्ति डीके जैन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया है।

क्‍या था मामला ?

पूर्व वैज्ञानिक नारायणन का कहना था कि उन्हें जासूसी के झूठे केस में फंसाया गया था। बता दें कि 1994 के जासूसी मामले में नारायणन और एक अन्य को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने कुछ गुप्त दस्तावेज पाकिस्तान को दिए थे। जांच के बाद सीबीआई ने कहा था कि ये आरोप झूठे हैं। हालांकि इस मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए गए, लेकिन 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने उन्‍हें एक लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया था। इसके बाद नारायणन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पहुंचे, जहां से मार्च 2001 में उन्‍हें 10 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया गया। लेकिन वह इससे संतुष्ट नहीं हुए और सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। नारायणन तभी से यह कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।

क्‍या कहना है पूर्व वैज्ञानिक का ?

नंबी नारायण ने अपनी अर्जी में केरल के पूर्व डीजीपी सिबी मैथ्यू और अन्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। दरअसल, सिबी मैथ्यू ने ही इस जासूसी कांड की जांच की थी। नंबी नारायण ने केरल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि डीजीपी सिबी मैथ्यू और दो रिटायर्ड पुलिस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की कोई जरूरत नहीं है। इन्‍हीं अफसरों को सीबीआई ने नंबी नारायण की गिरफ्तारी के लिए जिम्मेदार बताया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इन अफसरों की भूमिका की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं।

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