इस अस्पताल ने खोला रहस्य, इस वजह से ऑपरेशन के जरिए बच्चे पैदा कराते हैं डॉक्टर

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नई दिल्ली। ज्यादातर प्रसूताओं के मामले में अस्पताल सीजेरियन या सी-सेक्शन यानी ऑपरेशन से बच्चा पैदा कराने पर जोर देते हैं। इसे लेकर देशभर में सवाल भी उठते रहे हैं कि आखिर अस्पतालों में सी-सेक्शन के जरिए बच्चे क्यों नहीं पैदा कराए जाते। क्यों नहीं नॉर्मल डिलीवरी कराई जाती। दरअसल, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे में 2014-15 में पाया गया था कि बीते दशक के 11.6 फीसदी के मुकाबले सी-सेक्शन में 20.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में निजी अस्पतालों पर आरोप लगे कि वो पैसा कमाने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल करते हैं। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि किसी भी देश में होने वाले बच्चों के जन्म में सिर्फ 10 से 15 फीसदी ही सी-सेक्शन से होने चाहिए। दिल्ली के एक निजी अस्पताल ने ये रहस्य खोल दिया है कि आखिर महिलाओं का सी-सेक्शन करने पर इतना जोर क्यों दिया जाता है।

एक निजी अस्पताल ने किया ये अनोखा काम

निजी अस्पतालों पर सबसे ज्यादा सी-सेक्शन के आरोप लगते हैं, लेकिन अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक दिल्ली के एक निजी अस्पताल ने अनोखा काम किया है। सीताराम भरतिया अस्पताल में बीते साल महज 18 फीसदी ही सी-सेक्शन हुए। जबकि 2002 में इसी अस्पताल में सी-सेक्शन से बच्चे पैदा होने की दर 78 फीसदी थी। तो आखिर ये चमत्कार हुआ कैसे ? अस्पताल की डॉ. रिंकू सेनगुप्ता के मुताबिक नॉर्मल डिलिवरी से पहले महिलाओं को 18 घंटे तक प्रसव पीड़ा होती है, लेकिन जो कंसल्टेंट अस्पताल आते हैं, उन्हें बाकी अस्पतालों में भी जाना होता है। इसी वजह से वे सी-सेक्शन के जरिए ऑपरेशन से बच्चे पैदा करने पर जोर देते हैं। उन्होंने बताया कि इस तरीके को रोकने के लिए अस्पताल ने ऐसे डॉक्टरों को रखा, जो सिर्फ सीताराम भरतिया अस्पताल के लिए ही काम करते हैं। इससे मरीजों की पूरी देखभाल होती है और गंभीर मामलों में ही सी-सेक्शन करना पड़ता है।

नर्सों को भी दी ट्रेनिंग

इसके अलावा सीताराम भरतिया अस्पताल की नर्सों को भी ट्रेनिंग दी गई और जिन महिलाओं को प्रसव पीड़ा होती है, उनके साथ हमेशा एक नर्स की ड्यूटी लगती है। डॉ. रिंकू के मुताबिक देखा ये गया कि महिलाएं सोचती हैं कि ऑपरेशन से प्रसव कराना उनके और बच्चे के लिए सुरक्षित होता है। ऐसी महिलाओं को बताया गया कि नॉर्मल डिलिवरी के क्या फायदे होते हैं।

नॉर्मल डिलिवरी में इजाफा

दिल्ली के साकेत स्थि मैक्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों के मुताबिक हाल के वर्षों में नॉर्मल डिलिवर की संख्या बढ़ी है। बेंगलुरू की एक डॉक्टर ने अखबार को बताया कि 70 फीसदी मामलों में महिलाएं नॉर्मल डिलिवरी के जरिए बच्चे को जन्म दे रही हैं।
 
दोबारा भी होता है सी-सेक्शन

सीताराम भरतिया अस्पताल ने पाया कि जिन महिलाओं का सी-सेक्शन होता है, उनमें से करीब 96 फीसदी का दूसरा बच्चा पैदा होने में भी सी-सेक्शन किया जाता है।

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