अब पहले पता चल जाएगा कहां आने वाला है भूकंप, वैज्ञानिकों ने खोजी तकनीक

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न्‍यूयॉर्क। दुनिया में कई जगह काफी विनाशकारी भूकंप आए हैं, जिनके चलते हजारों जानें गईं और करोड़ों का नुकसान हुआ। वैज्ञानिक काफी समय से इस पर काम कर रहे हैं कि हमें भूकंप आने की जानकारी पहले से मिल सके। इस बीच हाल ही में एक राहत देने वाली खबर आई है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस (AI) प्रणाली खोजी है, जिसकी मदद से यह पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा कि भूकंप के झटके कहां-कहां आ सकते हैं।

किसने की खोज ?

अमेरिका स्थित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक और गूगल इस आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस पर काम कर रहे हैं। उन्‍होंने दुनिया भर से भूकंप के डेटाबेस का विश्लेषण करने के लिए इस आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस प्रणाली का उपयोग किया है, जिससे यह पूर्वानुमान लगाया जा सके कि भूकंप के झटके कहां-कहां आ सकते हैं। यूनिवर्सिटी की एक वरिष्ठ शोधकर्ता फोएबे डीव्रीज ने गूगल पर एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा, ‘हमनें गूगल के मशीन लर्निंग विशेषज्ञ के साथ मिलकर इस पर काम किया है कि क्या हम झटकों की गहराई के विश्लेषण से यह पता लगा सकते हैं कि बाद में झटके कहां आएंगे।’

क्‍या कहना है शोधकर्ताओं का  ?

फोएबे डीव्रीज बताती हैं कि भूकंप आमतौर पर क्रमानुसार आता है। शुरुआत में ‘मुख्य झटका’ आता है और इसके बाद अक्सर कई छोटे-छोटे झटके आते रहते हैं। हालांकि ये झटके आमतौर पर मुख्य झटके से कम तीव्रता के होते हैं, लेकिन इनसे कई बार राहत व बचाव कार्यों में काफी बाधा पहुंचती है। अभी बाद के झटकों के समय और आकार को स्थापित प्रयोगसिद्ध सिद्धांतों से समझकर उसका पता लगाया जाता है, लेकिन इनके स्थानों की सटीक भविष्यवाणी करना अब भी चुनौती है।

कैसे लगाएंगे पता ?

शोधकर्ताओं की टीम ने दुनियाभर में आए 118 से ज्यादा विशाल भूकंपों से संबंधित सूचनाओं का एक डेटाबेस इकट्ठा किया। भूकंप के मुख्य झटके और बाद के झटकों के कारण प्रभावित स्थानों पर स्थिर दबाव में आने वाले परिवर्तनों के बीच संबंध का पता लगाने के लिए टीम ने इस आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस प्रणाली का प्रयोग किया है। डीव्रीज ने कहा कि यह प्रणाली उपयोगी पैटर्न की पहचान करने में सक्षम है। वह कहती हैं कि हालांकि इससे यह तो नहीं पता चल पाएगा कि भूकंप कब आएगा, लेकिन इसकी मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि मुख्‍य भूकंप के बाद कहां-कहां झटके आ सकते हैं। समय से पहले इसका पता लग जाने से राहत व बचाव कार्यों और मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए बेहतर कार्ययोजना बनाई जा सकेगी।

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