जानिए किस राज्य में नहीं लागू हो पाएगा समलैंगिकता पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

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नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दो वयस्क लोगों के बीच परस्पर सहमति से बने समलैंगिक संबंध देश में अब अपराध की श्रेणी में नहीं हैं। IPC की धारा 377 के तहत समलैंगिकता को अपराध बताने वाले हिस्से पर सुप्रीम कोर्ट ने 6 सितंबर को अहम फैसला सुनाया है, लेकिन देश का एक राज्‍य ऐसा भी है जहां सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लागू नहीं होगा।

कौन सा है यह राज्‍य ?

बता दें कि देश का यह इकलौता राज्‍य जम्मू-कश्मीर है। जम्मू-कश्मीर के LGBTQ (लेस्बि‍यन, गे, बाईसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर और क्विर) समुदाय को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का लाभ नहीं मिलेगा। दरअसल ऐसा होगा जम्‍मू-कश्‍मीर को धारा 370 के तहत मिली छूट के कारण। इस धारा के कारण मिली छूट की वजह से IPC की धाराएं जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होतीं। राज्य का अपना अलग संविधान और अलग दंड संहिता  है, जिसे रनबरी पेनल कोड (RPC) कहते हैं। RPC को राज्य के डोगरा वंश के शासक रणबीर सिंह ने लागू किया था। RPC के तहत सभी तरह के अप्राकृतिक यौन संबंध को अपराध माना गया है।

क्‍या है विकल्‍प ?

आईपीसी की धारा 377 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए बदलाव को जम्‍मू-कश्‍मीर में लागू करने के लिए फिलहाल दो विकल्प हैं। नियमों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर की विधानसभा इस बारे में कोई एक्ट बनाकर राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेज सकती है। इसके बाद राज्यपाल इसे आगे अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं। हालांकि राज्‍य में इस समय राज्यपाल शासन लागू है, इसलिए विधानसभा कोई कानून नहीं बना सकती। ऐसे में राज्यपाल सत्यपाल मलिक चाहें तो खुद ही इस बारे में राष्ट्रपति को सिफारिश भेज सकते हैं। दूसरे, सामान्‍य परिस्थितियों में इस मसले पर RPC को चुनौती नहीं दी जा सकती, लेकिन इसके लिए जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल दाखिल की जा सकती है। स्‍पष्‍ट है कि जम्मू-कश्मीर में भी अगर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लागू करना है तो इन दोनों में से कोई एक विकल्प चुना जा सकता है।

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