जानिए कैसे प्रचलन में आया एलजीबीटी समुदाय का इंद्रधनुषी रंग वाला झंडा

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नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट ने 6 सितंबर को समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटा दिया।  इस फैसले के बाद से देश में जगह-जगह एलजीबीटी समुदाय के लोगों ने इंद्रधनुषी रंग के झंडे के साथ सड़क पर उतर कर खुशी का इजहार किया। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि इस समुदाय के लोग इंद्रधनुषी झंडे के साथ क्‍यों दिखते हैं ? आखिर इसके पीछे क्‍या कहानी है, आइए आपको बताते हैं –

एलजीबीटी समुदाय की पहचान है रेनबो फ़्लैग

दरअसल ये इंद्रधनुषी रंग (रेनबो फ़्लैग) वाला झंडा एलजीबीटी समुदाय की पहचान है। दुनियाभर के समलैंगिक लोग अपनी एकजुटता दिखाने के लिए इस झंडे के साथ दिखाई देते हैं। इस रेनबो फ़्लैग को 1978 में एलजीबीटी समुदाय के प्रतीक के रूप में मान्यता दी गई। एक मानवाधिकार कार्यकर्ता पीटर टैटचल कहते हैं, ‘मुझे नहीं लगता कि विश्व में किसी भी दूसरे प्रतीक को इस तरह से मान्यता मिली है।’

किसने बनाया यह झंडा ?

सैन-फ्रांसिस्को के एक कलाकार गिलबर्ट बेकर ने शुरुआत में 8 रंगों वाला झंडे का डिज़ाइन पेश किया था। यह झंडा पहली बार 25 जून को गे फ़्रीडम डे के दिन फ़हराया गया था। बेकर का कहना था कि वो इसके ज़रिए विविधता को दिखाना चाहते थे और यह बताना चाहते थे कि उनकी सेक्‍सुएलिटी उनका मानवाधिकार है। सैन-फ्रांसिस्को के बाद यह झंडा न्यूयॉर्क और लॉस एंजिल्स में फ़हराया गया और वर्ष 1990 तक यह दुनियाभर में एलजीबीटी समुदाय का प्रतीक बन गया।

रेनबो फ्लैग में हैं 6 रंग

शुरू-शुरू में रेनबो फ़्लैग में 8 रंग जोड़े गए थे। इन रंगों का चुनाव इस तरह से किया गया था कि ये ज़िंदगी के अलग-अलग पक्ष को प्रतिबिंबित करें। वास्‍तव में इन रंगों का मतलब इस प्रकार है –

  • गुलाबी –सेक्‍सुएलिटी
  • लाल – ज़िंदगी
  • नारंगी – इलाज
  • पीला – सूरज की रोशनी
  • हरा – प्रकृति
  • फ़िरोज़ी – कला
  • नीला – सौहार्द
  • बैंगनी – इंसानी रूह

हालांकि बाद में इन रंगों को 8 से घटाकर 6 कर दिया गया। इसमें से फ़िरोज़ी और बैंगनी रंग को हटा दिया गया। फ़्लैग इंस्टीट्यूट के ग्राहम बार्टम ने बीबीसी से बातचीत में बताया, ‘इस झंडे को इतना पसंद किए जाने का कारण इसकी सादगी है जो सबको साथ लेकर चलती है। ये एक तरह से ओलंपिक रिंग्स जैसा ही है। इसे इस तरह से डिज़़ाइन किया गया है कि भाग लेने वाले सभी देशों के झंडे के रंग इसमें शामिल हो सकें।’

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