वीडियोज देखकर इस इंजीनियर ने शुरू की स्ट्रॉबेरी की खेती, बदल रहा है गांव की सूरत

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पाली (राजस्थान)। कुछ करने की लगन हो तो दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं है। राजस्थान में पले-बढ़े दीपक नायक ने इसे साबित कर दिया है। पाली के रहने वाले दीपक ने इंजीनियरिंग कर रखी है लेकिन इन दिनों राजस्थान में स्ट्रॉबेरी की खेती करके गांव की सूरत बदल रहे हैं।

कैसे हुए प्रेरित

इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद वह फ्रीलांस वेब डिजाइनिंग करने लगे और उनका वह काम भी अच्छा चल निकला। दीपक को सिर्फ देश से ही नहीं, बल्कि विदेशी क्लाइंट्स भी मिलने लगे। अच्छा काम मिलने के बाद भी दीपक अपने पुराने दिनों जैसे सुकून की कमी महसूस कर रहे थे, जो उन्हें अपने खेतों में घूमने के दौरान मिलता था। पाली के बिरियातिन कलान गांव में उनका एक फार्महाउस भी है। उन्होंने वहां जाने का प्लान बनाया। वहां जाकर उन्होंने देखा कि किसान आज भी पुरानी तकनीक का इस्तेमाल करके खेती कर रहे हैं। इससे उन्हें बहुत फायदा भी नहीं हो रहा है। दीपक ने बताया, ‘एक बार मैं महाराष्ट्र में छुट्टियां बिताने गया था। वहां मैंने सतारा और जलगांव में स्‍ट्रॉबेरी फॉर्म देखा। राजस्थान में भी मैंने कुछ ऐसा ही करने के बारे में सोचा।’

You-tube का लिया सहारा

दीपक ने कभी खेती नहीं की थी, इसलिए उन्होंने वहां के किसानों से इस बारे में जानने की कोशिश की। लेकिन वहां के किसानों ने स्‍ट्रॉबेरी का नाम इससे पहले कभी नहीं सुना था। उन्होंने फैसला किया अब वो खुद ही इसकी खेती करना सीखेंगे। इसके लिए उन्होंने You-tube का सहारा लिया। उन्होंने तमाम ऐसे वीडियोज देखे, जिससे उन्हें स्‍ट्रॉबेरी की खेती करने के बारे में जानकारी मिले। आखिरकार उनकी ये मेहनत रंग लाई।

दो महीने में ही मिलने लगी फसल

यूट्यूब से तरीका सीखने के बाद दीपक ने अपने फार्म हाउस में एक एकड़ भूमि में स्‍ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। सामान्‍यत: 1 एकड़ जमीन में 24,000 पौधे तक लगाए जा सकते हैं, लेकिन दीपक ने पौधों के बीच में ज्यादा दूरी रखते हुए एक एकड़ में 15 हजार पौधे ही लगाए। उन्‍होंने अक्टूबर 2017 में पौधे लगाए और दो महीने बाद ही दिसंबर में उन्हें फसल मिलनी शुरू हो गई। उन्होंने वहां के किसानों को भी इसकी खेती के बारे में बताया ताकि वो कमाई कर सकें।

तकनीक का इस्तेमाल

दीपक ने अपने खेत में ड्रिप सिंचाई का सिस्टम लगवाया। दीपक मानते हैं कि स्ट्रॉबेरी की खेती करने वालों को इस तरह की ही सिंचाई का इस्तेमाल करना चाहिए। सिंचाई के बाद दीपक ने मल्किंग जैसी आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया। दीपक के गांव से जुड़े बिलावर और अजमेर में स्ट्रॉबेरी की अच्छी मांग है। ऐसा इसलिए क्योंकि आस-पास के इलाकों में इसकी खेती ही नहीं हो रही है। दीपक 200 रुपए प्रति किलो की दर से स्ट्रॉबेरी बेचते हैं। आज दीपक की स्‍ट्रॉबेरी पूरे राजस्‍थान में धूम मचा रही है।

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